नेपाल और भारत भौगोलिक दृष्टि से तो पड़ोसी राष्ट्र हैं ही, सांस्कृतिक परंपरा के दृष्टि से भी अभिन्न हैं। नेपाल-भारत संबंध काफी मजबूत रहा है, दूसरा कोई देश इतना करीब नहीं है, जितना भारत। यह निकटता सदियों से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समता की है। हमारी सीमा से सटे हुए और भी देश हैं, लेकिन हमारी भावनात्मक निकटता इतनी और किसी देश से नहीं है। नेपाल-भारत के बीच प्राचीन काल से ही सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंध भी रहा है। यह अविकसित अवस्था से लेकर आज की अल्पविकसित अवस्था तक की दौर में नेपाल-भारत के पूँजी और व्यापारियों का एक अच्छा बाज़ार रहा है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा 1751 कि.मी. है जो सांस्कृतिक और आर्थिक एकीकरण को प्रोत्साहित करती है भारत के रक्सौल, मुझ़फ्फ़रपुर, गोरखपुर, टनकपुर आदि क्षेत्रों से नेपाल के व्यापारियों का सीधा संबंध रहता आया है।
भारत-नेपाल सीमा से घरेलू उपयोग के लिए 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने पर सीमा शुल्क लगाने के सरकारी निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई है। याचिका में तर्क दिया है कि नेपाल-चीन सीमा या त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने वाले यात्रियों के लिए सीमा शुल्क छूट की सीमा अधिक है, लेकिन भारत के साथ खुली सीमा पर केवल 100रुपये की सीमा तय करना मधेस और तराई क्षेत्र के नागरिकों साथ भेदभाव है। ऐसे इस सीमा शुल्क को अव्यावहारिक और अतार्किक बताया गया है। भारत-नेपाल सीमा पर नियमों की सख्ती ने सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के आम लोगों को दैनिक उपयोग के वस्तुएं लाते समय सुरक्षाकर्मियों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सख्ती का सीधा असर याचिकाकर्ताओं ने वित्त मंत्रालय द्वारा सीमा शुल्क से जुड़ी अधिसूचना रद्द करने के लिए मांग की है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि 1950 की नेपाल-भारत व्यापारिक संधि के प्रावधानों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वस्तुओं का सहज प्रवाह होना चाहिए। सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक जीवन पर दिखाई पड़ रहा है। सदियों पुराने बेटी-रोटी के संबंध अब कागजी प्रतिक्रियाओं, समय सीमा और दोनों देशों के संबंधों की दूरी बाधाओं में उलझता जा रहा है। हालांकि इस निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। ऐसे में सरकार का कहना है कि सरकार ने राजस्व चोरी रोकने और स्वदेशी उधोगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भन्सार महसुल अधिनियम 2081 के तहत, पिछले साल से कागजों में मौजूद इस नियम को अब सख्ती से लागू किया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर इसका व्यापक विरोध हो रहा है। नेपाली कांग्रेश पार्टी ने भी इस पर आपत्ति जताई है। जनता समाजवादी पार्टी के संरक्षक महंत ठाकुर ने एक विज्ञप्ति जारी कर इस नीति को नेपाल-भारत के बीच ऐतिहासिक, आर्थिक एवं सामाजिक संबंधों पर सरकार ने गहरी चोट बताया है साथ ही पुराने संबंधों को सहज रखने का मांग भी की है। ऐसे भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जासवाल ने इस मामलों को लेकर नेपाल के अधिकारियों से बातचीत भी की है, उन्होंने कहा है कि व्यक्तिगत या घरेलू उपयोग के लिए सामान ले जाने वाले आम नागरिकों को कोई परेशानी नहीं होगी।
भारत में अंग्रेजी शासन होने पर नेपाल के साथ व्यापारिक संबंध पहली बार सन् 1792 में व्यापारिक समझौता हुआ। ये दोनों देश मिलकर मुक्त व्यापार, सीमा शुल्क सहयोग करने के उपायों को सुगम बनाते हैं। भारत ही एकमात्र देश है, जिसके साथ नेपाल का आयात-निर्यात सबसे अधिक होता रहा है। उपलब्ध आकड़ों के अनुसार सन् 1959 तक भारत के साथ नेपाल का व्यापार कुल विदेशी व्यापार 98% था। हाल के दिनों में यह घटकर जहाँ भारत नेपाल के कुल आयात का 64% हो गया है, वहीं नेपाल का भारत को निर्यात 10% तक भी नहीं है। भारत के प्रमुख निर्यात में पेट्रोलियम, लौह एवं इस्पात, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और अनाज शामिल है।
भारत के साथ नेपाल का यह व्यापारिक संबंध मुख्यत: उत्तर सीमावर्ती प्रदेशों के साथ होता रहा है। इसके बाद दूसरी संधि भारत नेपाल के बीच 31 जुलाई 1950 को ‘नेपाल शांति तथा मैत्री संधि’ हुई थी, जो दोनों देशों के मध्य एक द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला है, जिसके अन्तर्गत दोनों देशों के बीच लोगों और वस्तुओं की मुक्त्त आवाजाही, रक्षा एवं विदेशी मामलों में घनिष्ठ संबंध और सहयोग की अनुमति प्रदान करती है। इस संधि के अनुसार दोनों देशों की नागरिकों के लिए एक दूसरे के देशों में बिना रोकावट रहने और काम करने की अनुमति देती है।
इस संधि ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक सहयोग को एक नया रूप दिया, जो दृढ़ दोनों देशों के लोगों को जन-से-जन एवं पारिवारिक बंधनों का प्रतिक भी है। जिसे ‘रोटी-बेटी’ का संबंध भी कहा जाता है। भारत में 8 मिलियन से अधिक नेपाली रहते और कार्य करते हैं। जो नेपाल की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वहीं 32,000 नेपाली सैनिक भारतीय गोरखा रेजीमेंट में कार्यरत हैं, जो सैन्य और भावनात्मक विश्वास का प्रतिक है।
भारत-नेपाल संबंधों में तनाव के कई कारक हैं जैसे नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय विरोधी भारत भावना, चीन का बढ़ता प्रभाव, तस्करी और उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली खुली सीमा सुरक्षा ढ़ाँचे की कमियाँ मुख्य अवरोधों में शामिल हैं। सीमा विवाद और भारत-विरोधी भावनाएँ नेपाल में राष्ट्रवादी प्रवृत्तियों के उभार ने द्विपक्षीय संबंधों में कूटनीतिज्ञ तनाव उत्पन्न किया है। विशेष रूप से वर्ष 2020 में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पयाधुरा को लेकर उत्पन्न क्षेत्रीय विवाद ने भारत द्वारा क्षेत्रीय अतिक्रमण की धारणा को और प्रबल किया है। यहीं नहीं नेपाल के कुछ राजनीतिक दलों ने भारत को एक बाधक शक्ति के रूप में भारत-विरोधी भाषणों से घरेलू समर्थन जुटाने का काम किया है।
ये अवरोध नेपाल के द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बाधित करता है। जबकि खुली सीमा और संपर्क परियोजनाओं ने द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय रूप बढ़ावा दिया है, भारतीय निर्यात नेपाल के सभी घरेलू उत्पाद का लगभग 16% हिस्सा बनते हैं। दोनों देशों के नदियां बेसिन जलविद्युत एवं सिंचाई सहयोग के अवसर प्रदान करते हैं, लेकिन साथ ही विवादों और चुनौतियों को भी जन्म देती है। महाकाली नदी संधि जैसी ठप पड़ी संधियाँ और जल बटवारे पर असहमति ऐसे तनावों को और बढ़ावा देती है। इसके अतिरिक्त नेपाल के तराई क्षेत्र में आने वाली बाढ़ भारत के सीमावर्ती राज्यों को भी प्रभावित करती है। इस तरह के राजनीतिक उतार-चढ़ाव आते रहे हैं बावजूद इसके दोनों देशों के सामाजिक संबंधों को कमजोर नहीं कर सके है।

लेखिका डॉ. रक्षा कुमारी झा नेपाल से हैं और जेएनयू से पीएचडी हैं।
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Отдельно стоит выделить ситуации, когда семья сталкивается не только с алкоголем, но и с употреблением наркотиков. В таких случаях врачебная консультация особенно важна, поскольку последствия интоксикации могут отличаться, а признаки наркомании и алкоголизма иногда накладываются друг на друга. Если речь идет о смешанном употреблении, подход к помощи на дому требует особой осторожности.
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