नेपाल में वास्तविक राजनीतिक बदलाव या सिर्फ सत्ता का खेल

नेपाल में बालेन शाह की नेतृत्व वाली सरकार को निरंतर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार बने महज 26 दिन हुए और  दो मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा है। सबसे पहले दीपक कुमार साह को प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पद से हटाया और अब गृहमंत्री सुदन गुरुंग को इस्तीफा देना पड़ा है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह
Written By : डॉ. रक्षा कुमारी झा | Updated on: April 27, 2026 1:01 am

गुरुंग को खुद पर लगे ‘मनी लॉन्ड्रिंग व अवैध संपत्ति’ के गंभीर आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा तो वही नेपाल के श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को पत्नी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगने पर हटाया गया।

गृहमंत्री सुदन गुरुंग के शपथ लेने के अगले दिन से ही नेपाल में सियासी भूचाल आ गया था, क्योंकि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया था। इनके अलावा पूर्वमंत्री दीपक खड़का, प्रांतीय सांसद रेखा शर्मा, काठमांडू के पूर्व सीडीओ छवि रिजाल, और व्यवसायी दीपक भट्ट व शंकर अग्रवाल सहित कई अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। देश के बड़े नेताओं, उच्च अधिकारियों एवं बड़े व्यवसायियों के गिरफ्तारी को लेकर चर्चा में रहे गुरुंग हाल के दिनों में आलोचनाओं के केंद्र में आ गए थे। इन गिरफ्तारियों को लेकर गृहमंत्री गुरुंग ने सोशल मीडिया पर ‘काउंटडाउन’ संख्याओं का उल्लेख शुरू किया था। हालांकि इनमें से कई लोग हिरासत से बाहर भी हो गए हैं।

किसी भी देश के लिए गृहमंत्री का पद बेहद संवेदनशील होता है। इस पद तक पहुँचने के लिए किसी भी नेता को व्यापक राजनीतिक अनुभव और राष्ट्रीय स्तर का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में एक गृहमंत्री, जिसके हाथ में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की जिम्मेदारी हो, उस पर इस तरह का आरोप लगना, सरकार के लिए चिंता का विषय है। असल सवाल यह है कि आख़िर शुरुआत में ही इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को क्यों दी गई, जिस पर ऐसे के विवाद खड़े हो सकते थे।

नई सरकार पर बिना भ्रष्टाचार के काम करके दिखाने का दबाव है। इसी बीच गृहमंत्री सुदन गुरुंग पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप बालेन शाह की रणनीति को  कमजोर कर सकता है। जो सरकार के आलोचक हैं उनका मानना है कि जो पार्टी परिवर्तन और नई राजनीति का वादा करके सत्ता में आई हो, वह धीरे-धीरे पुराने राजनीतिक ढांचे में ढलती दिखाई दे रही है।

नेपाल के मौजूदा मंत्रिमंडल में अब भी कुछ चेहरे ऐसे हैं, जिनकी क्षमता और नीयत को लेकर लोगों में शंका है। बहुमत की यह सरकार पहले से ही सुशासन, पारदर्शिता और नई राजनीतिक संस्कृति का दवा करती रही है। लेकिन उसी सरकार के मंत्री इस तरह के विवादों में फंसेंगे, तो यह बालेन सरकार की विश्वनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा। लेकिन सरकार के समर्थकों का मानना है कि दोनों मंत्रियों का इस्तीफा नैतिकता के आधार पर हुआ है।

लेखिका डॉ. रक्षा कुमारी झा नेपाल से हैं और जेएनयू से पीएचडी हैं।

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