चांद मेरा दिल : कमियों के बावजूद दिल को छू जाती है ये फिल्म

फिल्म 'चांद मेरा दिल' रिलीज हो गई है। दिल्ली में रिलीज से एक दिन पहले मीडिया के लिए विशेष शो आयोजित किया गया, जहां फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। निर्देशक विवेक सोनी की यह फिल्म आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं को रोमांटिक ड्रामा के फ्रेम में प्रस्तुत करने की कोशिश करती है। फिल्म का बड़ा हिस्सा हैदराबाद में शूट किया गया है और शहर के आधुनिक लोकेशंस, कॉलेज कैंपस और शहरी दृश्य इसकी विजुअल अपील को मजबूत बनाते हैं।

फिल्म के एक दृश्य में लक्ष्य और अनन्या पांडेय
Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: May 23, 2026 12:22 am

फिल्म की कहानी आरव और चांदनी के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कॉलेज के हल्के-फुल्के रोमांस से शुरू होकर भावनात्मक असुरक्षाओं, करियर, शादी और रिश्तों के दबाव तक पहुंचती है। शुरुआती हिस्से में फिल्म सहज और आकर्षक लगती है, लेकिन इंटरवल के बाद कहानी अचानक बेहद गंभीर और बोझिल हो जाती है। यही बदलाव कई जगह फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आता है।

स्क्रीनप्ले फिल्म को पूरी तरह संभाल नहीं पाता। कहानी एक साथ बहुत सारे विषयों — प्रेम, विवाह, मानसिक दबाव और टूटते रिश्तों — को समेटने की कोशिश करती है, लेकिन इस प्रक्रिया में उसका भावनात्मक संतुलन कमजोर पड़ जाता है। कई दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे महसूस होते हैं और कुछ संवाद अत्यधिक नाटकीय लगते हैं। फिल्म का दूसरा हिस्सा विशेष रूप से धीमा पड़ जाता है, जिससे इसकी भावनात्मक पकड़ ढीली होती दिखाई देती है।

अभिनय की बात करें तो लक्ष्य अपने किरदार में ईमानदारी और संवेदनशीलता लेकर आते हैं। कई भावुक दृश्यों में उनका संयमित अभिनय प्रभाव छोड़ता है। वहीं अनन्या पांडेय ने अपने किरदार में मेहनत की है और कुछ दृश्यों में वे प्रभावित भी करती हैं, लेकिन ऊँचे भावनात्मक पलों में उनकी प्रस्तुति कई बार जरूरत से ज्यादा नाटकीय महसूस होती है। दोनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री कुछ हिस्सों में असर छोड़ती है, हालांकि पूरी फिल्म में वह निरंतरता नहीं बन पाती जिसकी कहानी को जरूरत थी।

फिल्म की सबसे मजबूत बात इसकी सिनेमैटोग्राफी और संगीत है। हैदराबाद में फिल्माए गए दृश्य स्क्रीन पर बेहद खूबसूरत लगते हैं और फिल्म के भावनात्मक माहौल को बेहतर बनाते हैं। सचिन- जिगर का संगीत कहानी को सहारा देता है और कुछ गाने लंबे समय तक याद रह जाते हैं।

‘चांद मेरा दिल ‘ पूरी तरह सफल फिल्म नहीं कही जा सकती, लेकिन यह आधुनिक रिश्तों की उलझनों को ईमानदारी से दिखाने की कोशिश जरूर करती है। कमजोर लेखन और असंतुलित गति के बावजूद फिल्म में संवेदनशीलता और भावनात्मक सच्चाई के कुछ अच्छे क्षण मौजूद हैं। यही कारण है कि इसकी कमियों के बावजूद यह एक बार देखी जा सकने वाली फिल्म बन जाती है।

रेटिंग: 3/5

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