पुरी में आस्था का महासैलाब: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू, भीड़ के दबाव में 1 श्रद्धालु की मौत,100 से ज्यादा बेहोश

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा गुरुवार को श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के वातावरण में शुरू हुई। ओडिशा के पुरी में आयोजित इस ऐतिहासिक उत्सव में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। 'जय जगन्नाथ' के जयघोष के बीच तीनों विशाल रथों को खींचने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह दिखाई दिया। हालांकि श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण कुछ स्थानों पर दबाव की स्थिति बन गई, जिसमें एक श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि कई अन्य100 से अधिक श्रद्धालु अस्वस्थ हो गए या घायल हुए।  स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण पाने का दावा किया है।

पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: July 16, 2026 9:07 pm

रथयात्रा के दौरान सुबह से ही पुरी की ग्रैंड रोड (बड़ा डांडा) पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राजनीतिक दलों के नेताओं और अनेक धार्मिक संगठनों ने देशवासियों को रथयात्रा की शुभकामनाएं दीं। सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मी, केंद्रीय बलों के जवान और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात रहीं। इसके बावजूद दोपहर के समय कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ने से आवागमन प्रभावित हुआ और कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक श्रद्धालु की मृत्यु हुई है, जबकि कई लोगों को प्राथमिक उपचार और अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा उत्सव

पुरी की रथयात्रा हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और भव्य धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। यह पर्व आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को आयोजित होता है, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर की यात्रा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह यात्रा भगवान के अपनी मौसी के घर जाने का प्रतीक है। नौ दिन बाद ‘बहुदा यात्रा’ के माध्यम से तीनों देवता पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं।

रथ खींचने का विशेष महत्व

धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि हर वर्ष भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, बांग्लादेश, नेपाल, मॉरीशस सहित अनेक देशों से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

सदियों पुरानी परंपरा

पुरी की रथयात्रा की परंपरा कई शताब्दियों पुरानी है और इसे विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। भगवान जगन्नाथ को ‘जगत के नाथ’ माना जाता है और उनकी रथयात्रा सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। इस उत्सव में जाति, वर्ग, भाषा और देश की सीमाएं गौण हो जाती हैं तथा सभी श्रद्धालु एक साथ भगवान के रथ को खींचते हैं।

प्रशासन अलर्ट, श्रद्धालुओं से संयम की अपील

अत्यधिक भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य है और रथयात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है।

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