कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे राहुल गांधी व अन्य कांग्रेस नेता वाहन से उतर कर पैदल मार्च करने लगे। इससे दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पीएम आवास के पास पहुंचने से पहले ही रास्ते में रोक दिया। ये सभी वहीं धरने पर बैठ गए। तीन घंटे तक चले इस नाटकीय घटनाक्रम में सरकार की ओर से मंत्री जितेन्द्र सिंह ने आकर राहुल गांधी से बातचीत की और धरना खत्म करने का अनुरोध किया। जब बात नहीं बनी तो राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कांग्रेस और विपक्ष के अनेक नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस ने बसों से छत्रसाल स्टेडियम ले गई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया, जहां बाद में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी उनसे मिलने पहुंचीं।
छत्रसाल स्टेडियम से रात 9:30 बजे के बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, “राहुल गांधी और हम सभी को हिरासत में लेकर यहां लाया गया है। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और इस पूरे मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जाए।” कांग्रेस का आरोप है कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है, जबकि सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मार्च और धरने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। इसके बाद कांग्रेस ने संकेत दिया कि संसद और सड़क दोनों पर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक से सरकार ने की बातचीत की पहल
इसी बीच सरकार ने सोनम वांगचुक प्रकरण में संवाद का रास्ता अपनाया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने पहले चिकित्सकों से उपचार की स्थिति जानी, फिर वांगचुक से अलग से बातचीत कर उनके आंदोलन से जुड़े मुद्दों को सुना। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों ने उनकी बातों पर गंभीरता से विचार का भरोसा दिया, हालांकि बैठक के बाद किसी ठोस निर्णय या सहमति की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।
मंगलवार का घटनाक्रम यह संकेत देने वाला रहा कि एक ओर विपक्ष सरकार को सड़क पर घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है, वहीं सरकार कुछ संवेदनशील मामलों में टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का संदेश देने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मानसून सत्र के आगामी दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं।
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