सड़क से संसद तक संग्राम: काले कपड़ों में विपक्ष, दिल्ली से पटना तक प्रदर्शन और झड़पें

राजधानी दिल्ली में संसद मार्च के बाद भड़के राजनीतिक टकराव की गूंज मंगलवार को संसद के भीतर और देशभर की सड़कों पर सुनाई दी। संसद का मानसून सत्र लगातार दूसरे दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। कांग्रेस सहित लगभग पूरे विपक्ष के सांसद काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे और सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच और छात्रों के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

संसद में काले कपड़ों में पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: July 23, 2026 12:07 am

संसद के बाहर भी माहौल तनावपूर्ण रहा। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया, जबकि भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्र आंदोलन की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। सोमवार को हिरासत में लिए गए कई विपक्षी नेताओं की रिहाई के बाद भी राजनीतिक टकराव कम नहीं हुआ।

इस बीच, आंदोलन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच संवाद की शुरुआत हुई। सरकार की ओर से आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर बातचीत का आश्वासन दिया गया। हालांकि सीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

दिल्ली की घटनाओं का असर कई राज्यों में भी दिखाई दिया। बिहार की राजधानी पटना सहित अनेक शहरों में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। कई स्थानों पर नारेबाजी, धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं हुईं, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।

उधर, मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन का नैतिक केंद्र बने हुए हैं। सरकार की ओर से उनसे संपर्क और बातचीत की कोशिशें जारी हैं, जबकि विपक्ष उन्हें लोकतांत्रिक प्रतिरोध का प्रतीक बताकर सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब व्यापक राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। संसद के भीतर गतिरोध, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव संकेत दे रहा है कि यदि वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज हो सकता है।

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