संसद के बाहर भी माहौल तनावपूर्ण रहा। विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया, जबकि भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्र आंदोलन की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। सोमवार को हिरासत में लिए गए कई विपक्षी नेताओं की रिहाई के बाद भी राजनीतिक टकराव कम नहीं हुआ।
इस बीच, आंदोलन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच संवाद की शुरुआत हुई। सरकार की ओर से आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर बातचीत का आश्वासन दिया गया। हालांकि सीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली की घटनाओं का असर कई राज्यों में भी दिखाई दिया। बिहार की राजधानी पटना सहित अनेक शहरों में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। कई स्थानों पर नारेबाजी, धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं हुईं, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।
उधर, मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन का नैतिक केंद्र बने हुए हैं। सरकार की ओर से उनसे संपर्क और बातचीत की कोशिशें जारी हैं, जबकि विपक्ष उन्हें लोकतांत्रिक प्रतिरोध का प्रतीक बताकर सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब व्यापक राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। संसद के भीतर गतिरोध, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और सरकार-विपक्ष के बीच बढ़ता टकराव संकेत दे रहा है कि यदि वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज हो सकता है।
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