अग्नि-4 भारत की स्वदेशी रूप से विकसित, दो चरणों वाली ठोस ईंधन (Solid Fuel) से संचालित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है। यह लगभग एक टन तक पारंपरिक अथवा परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है और मोबाइल लॉन्चर से दागी जा सकती है। अत्याधुनिक इनर्शियल नेविगेशन, माइक्रो नेविगेशन और री-एंट्री तकनीक इसे भारत के सामरिक मिसाइल बेड़े की महत्वपूर्ण कड़ी बनाती है।
क्या है इस परीक्षण का सामरिक महत्व
करीब 4,000 किलोमीटर की मारक क्षमता के कारण अग्नि-4 भारत को पूरे पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव के अलावा चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र तथा उसके दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों तक प्रभावी रणनीतिक पहुंच प्रदान करती है। भारत के विभिन्न लॉन्च स्थलों के आधार पर इसकी संभावित पहुंच में चीन के ल्हासा और कुनमिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी आ सकते हैं। इसके अतिरिक्त अफगानिस्तान के अधिकांश हिस्से, म्यांमार तथा हिंद महासागर क्षेत्र के कई सामरिक ठिकाने भी इसकी संभावित मारक सीमा में आते हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अग्नि-4 का उद्देश्य आक्रामक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की ‘विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोधक क्षमता’ (Credible Minimum Deterrence) को मजबूत करना है। यह क्षमता किसी भी संभावित परमाणु या बड़े सैन्य खतरे के विरुद्ध प्रभावी प्रतिरोध सुनिश्चित करने की भारतीय रणनीति का प्रमुख आधार है।
स्वदेशी रक्षा तकनीक की बड़ी उपलब्धि
अग्नि-4 में रिंग लेजर जाइरो आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, अत्याधुनिक ऑनबोर्ड कंप्यूटर, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और उच्च तापमान सहने वाली री-एंट्री तकनीक का उपयोग किया गया है। रक्षा वैज्ञानिकों का कहना है कि इन तकनीकों के कारण मिसाइल लंबी दूरी पर भी उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य भेदने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री ने दी वैज्ञानिकों को बधाई
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने सफल परीक्षण पर डीआरडीओ और स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह “टेक्स्टबुक मिशन” रहा। उन्होंने कहा कि इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी विकसित करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
फैक्ट फाइल
अग्नि-4
प्रकार: मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM)
मारक क्षमता: लगभग 4,000 किमी
ईंधन: दो चरणों वाला ठोस ईंधन
वारहेड क्षमता: लगभग 1,000 किलोग्राम तक पारंपरिक या परमाणु
लॉन्च प्लेटफॉर्म: सड़क आधारित मोबाइल लॉन्चर
विकास: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
परिचालन इकाई: स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC)
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