भारत के निजी अंतरिक्ष युग की ऐतिहासिक उड़ान, ऐसे बन गया दुनिया का तीसरा देश

 भारत ने शनिवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। हैदराबाद स्थित निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण कर देश के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई दे दी। इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद ऐसा तीसरा देश बन गया, जहां किसी निजी कंपनी ने स्वदेशी ऑर्बिटल रॉकेट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार और स्टार्टअप शक्ति का प्रतीक बताते हुए स्काईरूट की टीम को बधाई दी।

लॉच पैड पर विक्रम-1, फोटो क्रेडिट- इसरो
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: July 18, 2026 11:59 pm

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ‘मिशन आगमन’ के तहत लॉन्च किए गए विक्रम-1 ने लगभग 450 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। उड़ान के दौरान रॉकेट के चारों चरण निर्धारित योजना के अनुसार संचालित हुए और सभी पेलोड तय कक्षा में स्थापित किए गए। लॉन्च से ठीक पहले अंतिम तकनीकी जांच के दौरान स्वचालित प्रणाली ने एक पैरामीटर की समीक्षा के लिए काउंटडाउन को 35 मिनट के लिए रोका, लेकिन जांच पूरी होने के बाद मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

छह पेलोड लेकर गया विक्रम-1

विक्रम-1 अपने पहले मिशन में कुल छह पेलोड लेकर गया। इनमें दो उपग्रह और चार इन-ऑर्बिट टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेशन पेलोड शामिल हैं। प्रमुख पेलोड में हैदराबाद की Hex20 कंपनी का HEX20 उपग्रह, N Space Tech India का NILA उपग्रह तथा स्काईरूट का अपना तकनीकी प्रदर्शन पेलोड Cosmic Bloom शामिल है। इनके अलावा तीन अन्य ग्राहक पेलोड भी मिशन के साथ सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किए गए। विक्रम-1 की क्षमता निम्न पृथ्वी कक्षा में 350 किलोग्राम तक पेलोड पहुंचाने की है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए मील का पत्थर

वर्ष 2020 में भारत सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, विक्रम-1 की सफलता भारत को वैश्विक छोटे उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाएगी और निजी निवेश, स्टार्टअप्स तथा अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं को नई गति मिलेगी। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार कई गुना बढ़ाना है।

क्या है विक्रम-1 की खासियत

करीब 22 मीटर ऊंचा विक्रम-1 चार चरणों वाला ठोस ईंधन आधारित प्रक्षेपण यान है, जिसे छोटे उपग्रहों के व्यावसायिक प्रक्षेपण के लिए विकसित किया गया है। इसमें भारत में विकसित कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिनमें 3डी-प्रिंटेड रॉकेट इंजन, उन्नत प्रणोदन प्रणाली और स्वदेशी मार्गदर्शन प्रणाली प्रमुख हैं। इससे पहले स्काईरूट ने वर्ष 2022 में विक्रम-एस नामक सब-ऑर्बिटल रॉकेट का सफल परीक्षण किया था। विक्रम-1 उस सफलता का अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

इसरो में रहे वैज्ञानिकों का स्टार्टअप

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2018 में पूर्व इसरो वैज्ञानिक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। कंपनी का उद्देश्य छोटे उपग्रहों के लिए कम लागत और कम समय में व्यावसायिक प्रक्षेपण सेवाएं उपलब्ध कराना है। कुछ ही वर्षों में स्काईरूट भारत के सबसे चर्चित स्पेस-टेक स्टार्टअप्स में शामिल हो गई है। हालांकि मिशन की सफलता के बाद इसकी तकनीकी उपलब्धियों पर व्यापक चर्चा हो रही है, लेकिन स्काईरूट एयरोस्पेस, इसरो और IN-SPACe ने अभी तक इस मिशन की लागत का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।

पीएम मोदी ने दी बधाई

सफल प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विक्रम-1 मिशन भारत के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों और पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के नए युग की शुरुआत है।

यह मिशन केवल एक सफल रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का प्रतीक भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत वैश्विक व्यावसायिक अंतरिक्ष बाजार में अपनी उपस्थिति और मजबूत करेगा तथा आने वाले वर्षों में निजी स्पेस स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खुलेंगे।

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