राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राम माधव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया।
यह पुस्तक प्रकाशन से पहले ही चर्चा में रही है। अमेजन पर प्री-बुकिंग के दौरान यह बेस्टसेलर सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच चुकी है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इसे समकालीन विमर्श में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप बताते हुए जनसंवाद और लोकनीति के क्षेत्र में नई दृष्टि प्रदान करने वाली कृति कहा।
इसी पुस्तक का अंश
भारत की सांस्कृतिक विविधता को बहुत बार उसके विखंडन की तरह पढ़ा जाता है, जबकि यात्रा ने दिखाया कि यह विविधता उसके गहरे एकात्म का ही बाहरी रूप है। अलग-अलग क्षेत्र, अलग-अलग भाषिक स्वभाव, अलग-अलग लोकविश्वास, अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमियाँ। फिर भी कहीं एक अंत:सलिला बहती हुई मिलती है, जो सबको जोड़ती है। यह अंत:सलिला धर्म की भी है, स्मृति की भी, परिवार की भी, लोकमर्यादा की भी, और उस अदृश्य सांस्कृतिक बंधन की भी, जिसे शब्दों में पूरी तरह बाँध पाना कठिन है। संभवतः इसी कारण भारत एक माला की तरह दिखाई देता है। फूल भिन्न हैं, रंग भिन्न हैं, गंध भिन्न है, पर सूत्र एक है।
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