बिहार में लाठीचार्ज से आगे : युवाओं का गुस्सा क्यों फूटा, भर्ती परीक्षाओं से बढ़ी सरकार की मुश्किल

पटना में 25 अगस्त को 15 छात्र संगठनों ने संयुक्त रूप से मार्च किया, बैरिकेड टूटे तो पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज किया; दो छात्राएं बेहोश हुईं। पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी दाव किया गया। TRE-4 से 70वीं BPSC तक कई मुद्दों पर सरकार से आर-पार के मूड में अभ्यर्थी हैं।  बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का गुस्सा मंगलवार को राजधानी की सड़कों पर दिखाई दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 15 छात्र संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी गांधी मैदान से मार्च करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। जेपी गोलंबर के पास बैरिकेड टूटने और बाद में डाकबंगला इलाके में तनाव बढ़ने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

पटना में प्रदर्शनकारी छात्रों पर वाटर कैनन की बौछार
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: August 25, 2026 11:41 pm

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान दो छात्राएं बेहोश हो गईं, जिन्हें महिला पुलिसकर्मी एंबुलेंस से अस्पताल लेकर गईं। लाठीचार्ज के बारे में पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा की कोशिश हुई और पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए। पटना के एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पथराव करने वालों की पहचान की जा रही है। यानी कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों का अपना-अपना पक्ष है और मंगलवार का आंदोलन देखते ही देखते छात्र बनाम पुलिस टकराव में बदल गया।

सवाल सिर्फ लाठीचार्ज का नहीं, भर्ती व्यवस्था का है

पटना की सड़कों पर उतरा यह आक्रोश किसी एक परीक्षा के खिलाफ अचानक पैदा हुआ आंदोलन नहीं है। पिछले कई दिनों से गर्दनीबाग में छात्र भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर धरना दे रहे थे। मंगलवार को इसी आंदोलन को सड़क तक लाया गया।

छात्रों की प्रमुख मांगों में BPSC TRE-4 में PT और Mains की व्यवस्था, निगेटिव मार्किंग खत्म करना और 100 प्रतिशत डोमिसाइल लागू करना शामिल है। इसके साथ 70वीं BPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया और दूसरी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सवाल भी आंदोलन को व्यापक बना रहे हैं।

यही इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। छात्रों की नाराजगी केवल परीक्षा के पैटर्न तक सीमित नहीं है। उनके लिए सवाल यह है कि वर्षों की तैयारी, कोचिंग पर खर्च और आर्थिक संघर्ष के बाद जब परीक्षा होती है तो उसकी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और भरोसेमंद है।

TRE-4 बना तत्काल टकराव का केंद्र

शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 इस समय आंदोलन के केंद्र में है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि परीक्षा को लेकर प्रक्रिया सरल और स्पष्ट हो तथा PT और Mains के बजाय एकल परीक्षा की व्यवस्था की जाए। निगेटिव मार्किंग हटाने की मांग भी लगातार उठ रही है। लाइव हिन्दुस्तान ने भी मंगलवार के प्रदर्शन को इन्हीं मांगों से जोड़ते हुए रिपोर्ट किया कि छात्र सरकार से जल्द निर्णय की मांग कर रहे थे।

लेकिन इसके साथ 70वीं BPSC का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। कुछ प्रदर्शनकारी विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे हैं। ABP की रिपोर्ट के अनुसार आंदोलनकारियों ने BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।

इस तरह अलग-अलग परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की शिकायतें एक साझा आंदोलन में मिलती जा रही हैं। TRE-4, BPSC, BSSC और दूसरी भर्ती परीक्षाएं—हर जगह से उठ रही शिकायतों ने छात्र असंतोष का दायरा बढ़ा दिया है।

बैरिकेड से टकराव और फिर सड़क पर बल प्रयोग

गांधी मैदान से निकला मार्च जेपी गोलंबर पहुंचा तो पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की और उसके बाद वे डाकबंगला की तरफ बढ़े। वहां पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज किया।

नवभारत टाइम्स की लाइव रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान डीएसपी कामख्या सिंह के नाक में चोट लगी। एक ट्रेनी डीएसपी द्वारा एक छात्र को थप्पड़ मारने की घटना भी रिपोर्ट की गई, जिसके बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ी। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि प्रदर्शनकारियों के पथराव में पुलिसकर्मी घायल हुए।

इस घटनाक्रम ने आंदोलन को महज परीक्षा संबंधी मांगों से निकालकर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई के विवाद में बदल दिया।

सरकार कह रही—समाधान होगा, छात्र सीधे मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हैं

प्रशासन ने कुछ छात्र प्रतिनिधियों को मुख्य सचिव से मुलाकात के लिए भेजा। लेकिन प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया और कहा कि उनकी मांगें सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखी जानी चाहिए। प्रभात खबर के अनुसार छात्र प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव से मिलने गया और आंदोलनकारियों के एक वर्ग ने बिना मांगें माने समझौते का विरोध किया।

यहीं सरकार के सामने असली राजनीतिक चुनौती दिखाई देती है। सरकार बातचीत का रास्ता दिखा रही है, जबकि आंदोलनकारी मुख्यमंत्री से सीधे संवाद चाहते हैं। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दावा किया कि छात्रों ने जिन मुद्दों को लेकर धरना दिया था, उनका समाधान किया जा चुका है। दूसरी ओर छात्रों का सड़क पर उतरना बताता है कि सरकार के दावों और अभ्यर्थियों की संतुष्टि के बीच अभी दूरी बनी हुई है।

सरकार की तरफ से मंत्री श्रवण कुमार ने भी प्रदर्शनकारी युवाओं से विपक्ष के बहकावे में न आने की अपील करते हुए 2030 तक एक करोड़ रोजगार देने का दावा किया है।

विपक्ष को मिला सरकार पर हमला करने का मौका

पुलिस कार्रवाई ने आंदोलन को राजनीतिक रंग भी दे दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए इसे दमनकारी रवैया बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों से संवाद करने के बजाय बल प्रयोग कर रही है।

सरकार के लिए परेशानी यह है कि बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। राज्य में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए रोजगार की तलाश करते हैं। ऐसे में परीक्षा की तारीख, पैटर्न, डोमिसाइल, निगेटिव मार्किंग या कथित अनियमितता से जुड़ा कोई भी विवाद जल्दी व्यापक असंतोष का रूप ले सकता है।

लाठीचार्ज ने दबाया नहीं, सवाल और बड़ा कर दिया

मंगलवार की घटना का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बिहार में छात्र आंदोलन का मुद्दा अब केवल एक परीक्षा नहीं रहा। एक तरफ अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा, पारदर्शिता और रोजगार के अवसर मांग रहे हैं; दूसरी तरफ सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बातचीत के जरिए समाधान का दावा कर रही है। लेकिन गांधी मैदान से डाकबंगला तक हुई झड़प, वाटर कैनन, लाठीचार्ज, हिरासत और घायल छात्रों-पुलिसकर्मियों की तस्वीरों ने इस असंतोष को पूरे राज्य के सामने ला दिया है। अब सरकार के सामने चुनौती केवल प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की नहीं है। असली चुनौती यह है कि क्या वह भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं के भीतर पैदा हुए अविश्वास को दूर कर पाएगी?

क्योंकि बिहार में चुनावी राजनीति के बीच रोजगार का सवाल पहले से ही सबसे संवेदनशील मुद्दों में है। ऐसे में मंगलवार का छात्र प्रदर्शन एक दिन की पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर युवा असंतोष की चेतावनी बन गया है। सरकार के लिए यह तय करना होगा कि इस आवाज का जवाब बैरिकेड और लाठी से दिया जाएगा या परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में ऐसे ठोस बदलावों से, जिनसे अभ्यर्थियों का भरोसा वास्तव में लौट सके।

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