पढ़ें, डॉ. कमला नन्द झा की पुस्तक “विद्यापति : राज काज समाज”

इस हफ्ते पुस्तक चर्चा में एक शोधपूर्ण पुस्तक "विद्यापति: राज, काज, समाज" इसके लेखक हैं समकालीन हिन्दी साहित्य के महत्पूर्ण समालोचक डॉ. कमला नन्द झा. कमला नंद जी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं.

पुस्तक के आवरण का अंश
Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: September 2, 2026 10:15 pm

“विद्यापति: राज काज समाज” एक बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक है. प्राचीन काल से ही बहुत सारे साहित्यकारों की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगर पूरे विश्व साहित्य को देखें तो समय के बड़े कवियों और नाटककारों ने तत्कालीन सरकार, समाज और राज काज की गंभीर प्रस्तुति अपनी रचनाओं में की है. पश्चिमी देशों में कवि दांते, शेक्सपियर जैसे कवियों ने भी तत्कालीन व्यवस्था की गंभीर चर्चा की है.

चौदहवीं शताब्दी के मिथिला के महत्वपूर्ण कवि विद्यापति ने ढेर सारी कविताएं, गीत और महाकाव्य लिखे. आज छह सौ वर्षों बाद भी विद्वान लोगों को कवि विद्यापति आकर्षित कर रहे हैं. कमलानन्द ने विस्तृत अध्ययन के बाद विद्यापति की रचनाओं के माध्यम से तत्कालीन राज काज, शासन व्यवस्था को विश्लेषित करने की कोशिश की है. 208 पृष्ट के इस पुस्तक में भूमिका के अतिरिक्त दस अध्याय हैं. सभी अध्याय के शीर्षक को देखें तो पुस्तक के बारे में एक स्पष्ट तस्वीर उभर कर सामने आती है.

देखें: 1.लिखनावली : देश-दशा का दस्तावेज  2. पुरुष परीक्षा : लोकवृत्त और राजवृत्त  3. कीर्तिलता :जो बुझीहिं सो करहिं प्रसंसा  4. भक्ति आंदोलन : मानुस जनम अनूप  5. शैवभक्ति -विलोपन: कारण एवं निहितार्थ  6. किरिषि करिअ मन लाए  7. स्त्री- दृष्टि: जुवती भए जनमे जनु कोई  8. भाषा-दृष्टि: देसिल बयना की प्रतिष्ठा  9. विद्यापति का जीवन 10. विद्यापति साहित्य. पुस्तक के प्रारंभ में लेखक ने एक छोटी सी भूमिका लिखी है. इसमें उन्होंने कहा है कि “..विद्यापति आदिकाल के एकमात्र (अमीर खुसरो को छोड़कर) प्रामाणिक कवि हैं. बावजूद वे फुटकल खाता में हैं.

प्रमाणिकता के अलावा विषय वैविध्य, काव्य- रूप वैविध्य और विचार -वैविध्य में इनके जोड़ का रचनाकार समूचे मध्यकाल में खोजना असंभव है …” विद्यापति युग को सही रूप में जानने और समझने के लिए इस पुस्तक का अध्ययन आवश्यक है. पुस्तक की भाषा सरल और बोधगम्य है. गंभीर विषयों को भी इतनी सरलता से रखा गया है कि आम पाठक भी इसे रुचि के साथ पढ़ना चाहेगा. छपाई सुन्दर है. पुस्तक अति पठनीय और संग्रहणीय है.

पुस्तक: विद्यापति: राज काज समाज, लेखक: डॉ.कमला नन्द झा, पृष्ठ: 208, प्रकाशक: अंतिका प्रकाशन प्रा.लि. ,मूल्य: रुपये 365.

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

ये भी पढ़ें :-अतिपठनीय है प्रो. नंदकिशोर नंदन का कहानी संग्रह “जब गांधी चुनाव लड़े “

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *