SCO में मोदी-पुतिन-शी एक फ्रेम में, पाकिस्तान की ‘क्रॉप’ तस्वीर ने बढ़ाया कूटनीतिक तापमान

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक ही फ्रेम में नजर आना बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन की बड़ी तस्वीर पेश कर रहा है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हो रहे SCO सम्मेलन में एक तरफ भारत, रूस और चीन के शीर्ष नेता साथ खड़े दिखाई दिए, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक क्रॉप की गई तस्वीर ने अलग ही राजनीतिक संदेश की चर्चा छेड़ दी। बाद में सामने आई पूरी तस्वीर में मोदी समेत सभी नेता मौजूद थे।एक तरफ भारत, रूस और चीन के शीर्ष नेता साथ खड़े दिखाई दिए, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक क्रॉप की गई तस्वीर ने अलग ही राजनीतिक संदेश की चर्चा छेड़ दी। बाद में सामने आई पूरी तस्वीर में मोदी समेत सभी नेता मौजूद थे।

SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक ही फ्रेम में दिखना दुनिया को दे गया बड़ा संदेश
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: September 2, 2026 12:11 am

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) यूरेशिया का एक प्रमुख बहुपक्षीय संगठन है, जिसकी शुरुआत 2001 में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने, जबकि ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य बना। अब संगठन में 10 पूर्ण सदस्य देश—भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान हैं।

SCO का मूल फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, आर्थिक और व्यापारिक संबंध, ऊर्जा, कनेक्टिविटी तथा सदस्य देशों के बीच राजनीतिक संवाद पर है। यही वजह है कि भारत, रूस, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का एक ही मंच पर होना अपने आप में महत्वपूर्ण है—भले ही इनके बीच कई गंभीर मतभेद मौजूद हों। और इसी संदर्भ में SCO की ‘फैमिली फोटो’ भी सिर्फ एक सामान्य तस्वीर नहीं रह जाती।

एक फ्रेम में मोदी, पुतिन और शी

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीर सामने आई। तीनों नेताओं के बीच अलग-अलग मुलाकातों और बातचीत के बाद यह साझा फ्रेम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत, रूस और चीन तीनों आज वैश्विक राजनीति के बड़े शक्ति-केंद्र हैं।

रूस के साथ भारत की पुरानी रणनीतिक साझेदारी है। चीन भारत का पड़ोसी और प्रमुख आर्थिक साझेदार होने के साथ-साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धी भी है। वहीं रूस और चीन पिछले कुछ वर्षों में और करीब आए हैं।

इसके बावजूद भारत तीनों शक्ति-केंद्रों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध आगे बढ़ा रहा है। यही भारत की रणनीतिक स्वायत्तता** और बहुध्रुवीय कूटनीति का सबसे बड़ा संकेत है।**

मोदी-पुतिन की कार डिप्लोमेसी ने इस तस्वीर को और महत्व दिया। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की जरूरत पर भी जोर दिया। यानी भारत रूस के साथ करीबी संबंध रखते हुए भी युद्ध के मुद्दे पर अपनी स्वतंत्र स्थिति बनाए हुए है।

फिर आई पाकिस्तान की ‘क्रॉप’ तस्वीर

इसी सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक तस्वीर ने नया विवाद खड़ा कर दिया। पाकिस्तान PMO से साझा की गई तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई नेता दिखाई नहीं दिए। रिपोर्टों के अनुसार तस्वीर दोनों तरफ से क्रॉप की गई थी, जिससे शहबाज शरीफ अपेक्षाकृत केंद्र में दिखाई दे रहे थे।

इसके बाद सामने आई पूरी तस्वीर में मोदी, पेजेशकियन और अन्य नेताओं समेत पूरा समूह दिखाई दिया। शहबाज शरीफ ने भी बाद में पूरी तस्वीर साझा की। यही वजह है कि मीडिया में दोनों तस्वीरों को अगल-बगल रखकर दिखाया जा रहा है—एक तस्वीर में मोदी समेत कई नेता गायब हैं और दूसरी में SCO के सभी प्रमुख नेता एक साथ दिखाई दे रहे हैं। इस घटना को लेकर सवाल इसलिए भी उठा क्योंकि SCO कोई द्विपक्षीय भारत-पाकिस्तान बैठक नहीं, बल्कि 10 देशों का बहुपक्षीय संगठन है। ऐसे में उसकी आधिकारिक समूह तस्वीर में किसी सदस्य देश के नेता का गायब होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

हालांकि तस्वीर में केवल मोदी ही नहीं, कुछ अन्य नेता भी क्रॉप हुए थे। इसलिए इसे सीधे तौर पर केवल “मोदी को हटाने” की आधिकारिक पाकिस्तानी नीति कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन यह संयोग भी दिलचस्प है कि क्रॉप की गई तस्वीर में शहबाज शरीफ अधिक प्रमुख नजर आए और बाद में पूरी तस्वीर सामने आने पर मोदी समेत बाकी नेताओं की मौजूदगी स्पष्ट हो गई।

 तस्वीरों के बीच दिखती बड़ी कूटनीति

एक तरफ पाकिस्तान की क्रॉप की गई तस्वीर है, दूसरी तरफ उसी सम्मेलन की पूरी तस्वीर में मोदी, पुतिन और शी एक साथ हैं। यानी तस्वीरों की इस पूरी कहानी में दो अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिखाई देते हैं। पाकिस्तान के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को प्रमुखता देने वाली तस्वीर शायद घरेलू राजनीतिक संदेश के लिहाज से उपयोगी हो सकती थी। लेकिन SCO की वास्तविक समूह तस्वीर इससे कहीं बड़ी कूटनीतिक तस्वीर पेश करती है—जिसमें भारत के प्रधानमंत्री रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्षों के साथ उसी मंच पर खड़े हैं।

यहां रूस का रुख भी महत्वपूर्ण है। SCO में पाकिस्तान की मौजूदगी के बावजूद मोदी-पुतिन की बातचीत, दोनों नेताओं की गर्मजोशी और कार डिप्लोमेसी ने भारत-रूस संबंधों को सम्मेलन के प्रमुख घटनाक्रमों में बनाए रखा। इसे इस रूप में देखना अधिक उचित होगा कि रूस भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध रखता है, लेकिन भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का स्तर और राजनीतिक महत्व अलग है।

अमेरिका की नजर में भारत

इस पूरी तस्वीर को अमेरिका की नजर से देखें तो SCO का महत्व और बढ़ जाता है। संगठन में चीन और रूस जैसे अमेरिका के प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।

इसलिए वॉशिंगटन के लिए मोदी का पुतिन और शी के साथ एक फ्रेम में दिखाई देना दिलचस्प जरूर है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि भारत किसी रूस-चीन विरोधी अमेरिकी धुरी से निकलकर दूसरे खेमे में चला गया है।

भारत की नीति अब तक यही रही है कि वह अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाते हुए रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा संबंध बनाए रखे तथा चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और संवाद दोनों जारी रखे। SCO में भारत की यही स्थिति उसे दूसरे सदस्य देशों से अलग करती है। भारत किसी एक शक्ति-गुट का हिस्सा बनने के बजाय बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में खुद एक स्वतंत्र शक्ति-केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

एक तस्वीर में तीन शक्ति-केंद्र, दूसरी में पाकिस्तान का संदेश

SCO सम्मेलन से सामने आई तस्वीरों को साथ रखकर देखें तो कहानी सिर्फ एक फोटो विवाद की नहीं रह जाती। एक फ्रेम में मोदी, पुतिन और शी हैं। दूसरी तस्वीर में पाकिस्तान की ओर से क्रॉप किए गए फ्रेम को लेकर विवाद है। और इसी सम्मेलन में भारत रूस के साथ अपनी दोस्ती बनाए रखते हुए यूक्रेन युद्ध खत्म करने की अपील भी कर रहा है। यही SCO सम्मेलन का बड़ा संदेश है।

भारत रूस के साथ है, लेकिन रूस के युद्ध के साथ नहीं। चीन के साथ संवाद कर रहा है, लेकिन अपनी रणनीतिक चिंताओं से समझौता नहीं कर रहा और अमेरिका के साथ साझेदारी बढ़ा रहा है, लेकिन अपनी विदेश नीति को किसी एक खेमे तक सीमित भी नहीं कर रहा। SCO की फैमिली फोटो में मोदी-पुतिन-शी का एक साथ आना इसी बदलती बहुध्रुवीय दुनिया की तस्वीर है—और पाकिस्तान की क्रॉप की गई तस्वीर ने अनजाने में उसी तस्वीर को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

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