मुसहर समुदाय भी हमारे समाज का हिस्सा है : रामबहादुर राय

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि प्रभाग द्वारा ‘होमस्टेड लैंड एंटाइटलमेंट एंड मुसहर कम्युनिटी इन बिहार : ए सोशल वर्क पर्सपेक्टिव’ पुस्तक के लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। पुस्तक के लेखक डॉ. हरीश कुमार हैं और इसका प्रकाशन मानक पब्लिकेशन द्वारा किया गया है। कार्यक्रम में आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष राम बहादुर राय मुख्य अतिथि, जबकि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

पुस्तक का लोकार्पण करते प्रो. के. अनिल कुमार, श्री अरविंद मोहन, श्री रामबहादुर राय, प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रो. नीना पांडेय, डॉ. हरीश कुमार
Written By : डेस्क | Updated on: September 1, 2026 11:13 pm

परिचर्चा में प्रख्यात पत्रकार श्री अरविंद मोहन तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन एवं समाज कार्य विभाग की प्रमुख प्रो. नीना पांडेय ने पैनलिस्ट के रूप में अपने विचार रखे। कार्यक्रम का स्वागत संबोधन आईजीएनसीए के कलानिधि विभागाध्यक्ष डॉ. के. अनिल कुमार ने किया। पुस्तक के लेखक डॉ. हरीश कुमार ने पुस्तक की विषयवस्तु, उसके लेखन की पृष्ठभूमि और मुसहर समुदाय से जुड़े सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डाला।

रामबहादुर राय ने कहा कि यह पुस्तक बहुत सराहनीय प्रयास है। यह पुस्तक मुसहर समुहार की जिंदगी की ओर एक खिड़की खोलती है। उन्होंने कहा कि कारपोरेट जगत के ‘सीएसआर’ फंड का कुछ अंश मुसहर और कमजोर समुदायों के विकास के लिए उपलब्ध हो, ऐसी कोशिश की जानी चाहिए। मुसहर समुदाय भी हमारे समाज का हिस्सा है।

प्रो. राणा प्रताप सिंह ने सामाजिक व्यवस्था की तुलना विज्ञान, विशेष रूप से नर्वस सिस्टम और न्यूरॉन्स से करते हुए कहा कि मानव शरीर और उसके अंग एक जटिल प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं और इसलिए समाज भी एक जटिल व्यवस्था है। जिस प्रकार तंत्रिका तंत्र के सुचारु रूप से कार्य करने के लिए पूरे शरीर का समग्र रूप से कार्य करना आवश्यक है, उसी प्रकार समाज के प्रभावी रूप से कार्य करने के लिए मुसहर समुदाय का विकास और उसका सशक्तीकरण आवश्यक है।

अरविंद मोहन ने कहा कि घर मुसहर और कमजोर समुदायों के लोगों के लिए रहने की जगह नहीं है, उनके जीवन का आधार होता है। उनके सम्मान और सुरक्षा का आधार होता है। प्रो. नीना पांडेय ने कहा, जब हम अपनी जड़ों की ओर झुककर देखते हैं, तो पाते हैं कि वहां बहुत कुछ अस्वीकार्य है। हमें समाज को शिक्षित करने की ज़रूरत है और उससे भी बड़ी बात है कि शिक्षा देने वालों को भी शिक्षित करने की जरूरत है। यह पुस्तक एक शुरुआत है।

पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर बिहार के मुसहर समुदाय की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति, आवासीय भूमि के अधिकार और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुसहर समुदाय जैसे वंचित एवं हाशिए पर रहे समुदायों के अधिकारों और उनके सामाजिक सशक्तीकरण के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण तथा प्रभावी सामाजिक हस्तक्षेप आवश्यक हैं। परिचर्चा में सामाजिक न्याय, भूमि-अधिकार और वंचित समुदायों के सशक्तिकरण जैसे व्यापक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में कला, संस्कृति, सामाजिक कार्य, पत्रकारिता और अकादमिक जगत से जुड़े लोगों की सहभागिता रही।

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