SCO में मोदी-पुतिन की कार डिप्लोमेसी, भारत ने दिया युद्ध खत्म करने का संदेश

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की गर्मजोशी भरी मुलाकात ने एक बार फिर भारत-रूस रिश्तों को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। दोनों नेताओं ने न केवल मुलाकात के दौरान हाथ मिलाया और गले मिलकर अभिवादन किया, बल्कि बातचीत के बाद एक ही कार में सवार होकर विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह के लिए रवाना हुए। इस ‘कार डिप्लोमेसी’ ने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: September 1, 2026 12:02 am

लेकिन इस मुलाकात का सबसे अहम राजनीतिक संदेश कार की सवारी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की वह अपील रही जिसमें उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया। मोदी ने पुतिन से कहा कि दुनिया को ‘अनंत युद्ध’ से निकलकर ‘युद्ध की समाप्ति’ की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई उम्मीद पैदा करता है। भारत ने सभी शांतिपूर्ण प्रयासों और संवाद के जरिए संघर्ष के समाधान का समर्थन दोहराया।

प्रधानमंत्री की यह अपील इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखते हुए यूक्रेन युद्ध पर लगातार संवाद और कूटनीति को समाधान का रास्ता बताया है। बिश्केक में भी मोदी ने स्पष्ट किया कि विवादों और संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। भारत सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्षों समेत विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

एक कार में मोदी-पुतिन, फिर क्यों चर्चा में आई ‘कार डिप्लोमेसी’?

मोदी और पुतिन का एक साथ कार में सफर करना पहली बार नहीं है। बिश्केक की यह तस्वीर पिछले साल चीन के तियानजिन में हुई ऐसी ही यात्रा की याद दिलाती है, जब दोनों नेता SCO सम्मेलन के दौरान एक कार में साथ गए थे। दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों नेताओं ने एक साथ कार में सफर किया था। इसीलिए इस बार की तस्वीर को मीडिया ने महज एक सामान्य प्रोटोकॉल कार्यक्रम के बजाय ‘कार डिप्लोमेसी’ के रूप में देखा है।

इस यात्रा की खासियत यह भी रही कि दोनों नेताओं की औपचारिक द्विपक्षीय बैठक के बाद यह निजी सफर हुआ। India Today और Hindustan Times समेत कई मीडिया रिपोर्टों ने इसे दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल और रिश्तों की गर्माहट के प्रतीक के रूप में रेखांकित किया है।

हालांकि, कार में साथ सफर करने को सीधे तौर पर चीन या पाकिस्तान को दिया गया संदेश कहना आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है। इसे बेहतर तरीके से कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। SCO के मंच पर भारत, रूस, चीन और पाकिस्तान सभी मौजूद हैं और ऐसे में मोदी-पुतिन की सार्वजनिक नजदीकी भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को जरूर रेखांकित करती है। इस तस्वीर का एक संदेश यह भी है कि भारत रूस के साथ अपने संबंधों को किसी तीसरे देश के दबाव या समीकरण से निर्धारित नहीं करता।

दोस्ती कायम, लेकिन युद्ध पर भारत का रुख स्पष्ट

बिश्केक की बैठक में मोदी और पुतिन ने भारत-रूस के व्यापक संबंधों की भी समीक्षा की। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार, उर्वरक, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। भारत सरकार ने दोनों देशों की ‘Special and Privileged Strategic Partnership’ को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

यानी मोदी की शांति अपील को भारत-रूस रिश्तों से दूरी के संकेत के रूप में नहीं देखा जा सकता। उलटे, यही इस मुलाकात की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक विशेषता है—भारत ने रूस के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी कायम रखते हुए युद्ध समाप्त करने का अपना संदेश भी उतनी ही स्पष्टता से दिया।

Reuters ने भी मोदी की अपील को अपनी रिपोर्ट का केंद्रीय विषय बनाया और बताया कि प्रधानमंत्री ने मानवता के हित में यूक्रेन युद्ध समाप्त करने पर जोर दिया। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक रूस की अपनी स्थिति में तत्काल बदलाव का कोई स्पष्ट संकेत नहीं है।

इस तरह बिश्केक में मोदी-पुतिन की तस्वीर को केवल दो नेताओं की गर्मजोशी भरी मुलाकात के रूप में देखना पूरी कहानी नहीं होगी। एक ही कार में सफर ने रिश्तों की गर्माहट दिखाई, जबकि मोदी के शब्दों ने भारत की कूटनीतिक प्राथमिकता—संवाद, शांति और युद्ध की समाप्ति—को सामने रखा और शायद यही इस मुलाकात का सबसे बड़ा संदेश है: भारत रूस का साझेदार है, लेकिन युद्ध का समर्थक नहीं।

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