“देशदीप ” जी की प्रकाशित पुस्तकों की सूची लंबी है. इनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं: 1. पापिन -पाखी तथा अन्य कहानियाँ 2. अपनी माटी तथा अन्य कहानियाँ 3. जल -पुरुष तथा अन्य कहानियाँ इत्यादि. इसके अतिरिक्त आधा दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं. “देशदीप” जी की वर्तमान पुस्तक एक ग़ज़ल संग्रह है जो इसी वर्ष प्रकाशित हुई है. 120 पृष्ठ के इस हार्ड बाउंड पुस्तक में 99 ग़ज़ल शामिल हैं. संग्रह के प्रारंभ में कवि-लेखक हिमकर श्याम ने संक्षिप्त भूमिका लिखी है “हिन्दी में छन्दबद्ध लिखनेवाले अधिकांश रचनाकार ग़ज़लें लिख रहे हैं. उन्हीं में एक सिद्ध नाम है-चंद्रिका ठाकुर ‘देशदीप’ का. उनका प्रथम ग़ज़ल संग्रह ‘चलता रहा मैं धूप में ‘ आपके हाथों में है ” इस ग़ज़ल संग्रह की विशेषता है जीवन के विभिन्न आयामों संघर्षों, पीड़ाओं को लेकर ग़ज़लें लिखी गई हैं.
कहते है न कि कभी युग के सत्य को रेखांकित करता है. देशदीप जी ने भी समान्य जीवन के लगभग प्रत्येक पक्ष को छुआ है. यूँ तो ग़ज़ल का इतिहास बहुत पुराना है. पुराने फारस से भारत तक लंबी यात्रा तय की है इसने. पर भारत में अमीर खुसरो से लेकर अनगिनत शायरों ने इसे पूरे भारतीय रंग में भर दिया. बाद मे दुष्यंत कुमार ने इसका पूरा नया रूप ही दे दिया. इसमें उर्दू और फ़ारसी के शब्द कम होते चले गए .यही कारण है कि ग़ज़ल धीरे धीरे आम हिन्दी कवियों और पाठकों की पसंदीदा बन गई. चंद्रिका ठाकुर जी के ग़ज़लों के कुछ शीर्षक देखिए तो इस संग्रह के ग़ज़लों के रूप का एक अनुमान हो जाएगा.
कुछ शीर्षक हैं: साए लिए किसी ने, अवसर नहीं मिला, अपनी वफा, हाले दिल, कुछ करो, आ गया है ये कहाँ, नदी का भार, कोई सूरज, बुला रहा है, अब न कोई जुल्म, बुला रहा है इत्यादि. रोचक है कि चंद्रिका जी ने ग़ज़ल मे हिन्दू देवताओं का भी आवाहन किया है. संग्रह में जय गणपति, पधारो गणेश, अब राम चाहिए जैसे ग़ज़ल भी शामिल हैं. एक ग़ज़ल ‘कुछ तिनके ‘ की कुछ पंक्तियाँ देखिए:”कुछ तिनके कुछ ख्वाब हमारे/कुछ यादें रंगीन लिए/क्या बतलायें इस आँधी ने/क्या क्या मुझसे छीन लिए.” संग्रह के ग़ज़लों की भाषा सरल, बोधगम्य और पठनीय है . पुस्तक की छपाई और मुखपृष्ठ आकर्षक है. संग्रह पठनीय है.
पुस्तक: चलता रहा मैं धूप में (ग़ज़ल संग्रह), कवि:चंद्रिका ठाकुर ‘देशदीप’
प्रकाशक:विकल्प प्रकाशन, नई दिल्ली , पृष्ठ:120, मूल्य:रू.350.

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)
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