यह जानकारी सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने दी। प्रेस वार्ता को आईजीएनसीए के जनपद सम्पदा प्रभाग के अध्यक्ष प्रो. के. अनिल कुमार, मीडिया सेंटर के नियंत्रक अनुराग पुनेठा और नदी उत्सव के संयोजक अभय मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस बार नदी उत्सव की थीम है – ‘शाश्वत यमुना’।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु, लेखक एवं दार्शनिक स्वामी अवधेशानंद गिरि जी का उद्बोधन होगा, वहीं सम्मानित अतिथि के रूप में प्रख्यात कथक गुरु, नृत्यांगना एवं नृत्य निर्देशक डॉ. शोवना नारायण उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय करेंगे तथा स्वागत सम्बोधन आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी द्वारा दिया जाएगा।
प्रेस वार्ता में डॉ. सच्चिदानन्द जोशी ने बताया कि भारत में नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परम्पराओं और जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं। नदियों के किनारे हमारी सभ्यताएं विकसित हुईं और उनके साथ अनेक अनुष्ठान, लोक परम्पराएं और सांस्कृतिक सम्बन्ध जुड़े। नदी उत्सव का उद्देश्य इसी सांस्कृतिक सम्बन्ध और चेतना को पुनः सामने लाना तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। आज जब यमुना सहित अनेक नदियां प्रदूषण और संकट का सामना कर रही हैं, तब यह आवश्यक है कि विद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाली नई पीढ़ी नदियों से केवल उपयोग की दृष्टि से नहीं, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी के भाव से जुड़े। नदी उत्सव इसी जागरूकता को साहित्य, सिनेमा और अन्य रचनात्मक माध्यमों के जरिए व्यापक बनाने का एक प्रयास है।
उन्होंने आगे कहा, हमारी कोशिश है कि इस सम्बन्ध और चेतना को नई पीढ़ी तक भी पहुंचाया जाए। नई पीढ़ी यह समझे कि नदियों के साथ हमारा सम्बन्ध केवल उपयोग का नहीं, बल्कि संस्कृति, परम्परा और जीवन का है।
प्रो. के. अनिल कुमार ने कहा कि नदियां केवल एक भौतिक इकाई नहीं हैं, बल्कि भारत की संस्कृति, परम्पराओं और जीवनधारा का अभिन्न हिस्सा हैं। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को नदियों के इस गहरे सांस्कृतिक सम्बन्ध से परिचित कराया जाए और उनके प्रति संवेदना तथा जागरूकता को पुनः सुदृढ़ किया जाए।
तीन दिनों तक चलने वाले नदी उत्सव में कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें नदियों और नदी संस्कृति पर आधारित फिल्म फेस्टिवल, प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विचार गोष्ठियां शामिल हैं। 7वां नदी उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नदी, संस्कृति, पर्यावरण और समाज के अंतर्संबंधों को समझने का एक समग्र प्रयास है।
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