नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कलाकारों, फिल्मकारों और उनके प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की। महाराष्ट्र सरकार ने मराठी रंगमंच और हिंदी-मराठी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा की है।
रात ढाई बजे दोस्त को भेजा था संदेश
नाना पाटेकर के अंतिम घंटों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। *इंडियन एक्सप्रेस* के मुताबिक उन्होंने रात करीब 2:30 बजे एक दोस्त को संदेश भेजकर तबीयत खराब होने की बात कही थी। दोस्त ने बाद में संदेश देखा और करीब चार बजे उनके गोवा स्थित घर पहुंचा। उस समय नाना पाटेकर पसीने से तर थे और उनकी हालत तेजी से बिगड़ रही थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने का प्रयास किया गया। सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।उनके निधन के कुछ घंटे बाद सामने आई इन जानकारियों ने उनकी मौत को लेकर कई सवालों और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। अस्पताल के अनुसार मृत्यु का कारण कार्डियक अरेस्ट था।
स्टारडम से अलग बनाई अपनी पहचान
नाना पाटेकर का करीब पांच दशक का सफर भारतीय सिनेमा में एक अलग तरह की अभिनय परंपरा की कहानी है। उन्होंने पारंपरिक मायने में कभी खुद को सिर्फ ‘हीरो’ की छवि तक सीमित नहीं किया। रंगमंच से निकले नाना ने गंभीर, हिंसक, भावुक, हास्य और सामाजिक सरोकार वाले किरदारों को समान प्रभाव के साथ निभाया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग रूप दर्शकों के सामने आए। परिंदा के अन्ना से लेकर क्रांतिवीर के प्रताप नारायण तिलक और वेलकम के उदय शेट्टी तक उन्होंने ऐसे किरदार गढ़े जो लंबे समय तक दर्शकों की स्मृति में बने रहे। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी आवाज, ठहराव, संवाद बोलने का अंदाज और किरदार के भीतर उतर जाने की क्षमता मानी गई।
तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री
नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। रंगमंच और सिनेमा दोनों में उनके योगदान ने उन्हें मुख्यधारा के स्टार से अलग एक विशिष्ट अभिनेता की पहचान दी। उनका रिश्ता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था। किसान और सूखा प्रभावित परिवारों की मदद के लिए उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ नाम फाउंडेशन की स्थापना की। इस सामाजिक काम ने उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व को अभिनय से आगे एक अलग पहचान दी।
चार दिन पहले ही दिखे थे सार्वजनिक कार्यक्रम में
नाना पाटेकर की आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति उनके निधन से सिर्फ चार दिन पहले, 4 अक्टूबर को गोवा के डोना पाउला में आयोजित एक कार्यक्रम में हुई थी। इसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और 8 अक्टूबर की सुबह उनके निधन की खबर सामने आई। उनके निधन को फिल्म जगत सिर्फ एक अभिनेता की विदाई के तौर पर नहीं देख रहा। लगभग पांच दशक तक रंगमंच और सिनेमा में अपनी अलग छाप छोड़ने वाले नाना पाटेकर का जाना उस अभिनय शैली के एक बड़े अध्याय का अंत है, जिसमें चमक-दमक से ज्यादा किरदार, आवाज और अभिनय का वजन मायने रखता था।
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार उनका अंतिम संस्कार पुणे में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जहां प्रशंसकों और शुभचिंतकों को भी अंतिम दर्शन का अवसर मिलेगा।
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