सुप्रीम कोर्ट मार्च से अलग, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तारीख तय करने के लिए दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। पिछले तीन दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस की कार्रवाई, नेताओं और पत्रकारों की हिरासत, मेट्रो प्रतिबंध तथा प्रदर्शन के अधिकार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
11 विपक्षी नेताओं की संयुक्त याचिका, कल सुनवाई की संभावना
विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका में राहुल गांधी को मुख्य याचिकाकर्ता बनाया गया है। उनके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संजय राउत, माकपा के एम. ए. बेबी, भाकपा के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई. टी. मोहम्मद बशीर याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से कथित बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ अन्य चुनाव आयुक्तों को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, याचिका पर सोमवार को ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और इसे मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का रास्ता साफ करने के निर्देश दिए गए। ऐसे में 13 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम पुष्टि सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक सूची से होगी। विपक्ष ने पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने का अनुरोध किया था। मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। इसके बाद विपक्ष ने संयुक्त याचिका के माध्यम से अदालत का दरवाजा खटखटाया।
भगवान दास रोड पर रोका गया राहुल गांधी का मार्च
सोमवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। विपक्ष का कहना था कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
मार्च के दौरान पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेड लगाकर रास्ता रोक दिया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कुछ समय तक तनाव रहा। कुछ प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पर चढ़ने की कोशिश करने पर पुलिस ने उन्हें पीछे हटाया। मार्च अदालत तक नहीं पहुंच सका, लेकिन विपक्ष की कानूनी टीम ने याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने से मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि गलत तरीके से नाम हटाए गए मतदाता दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। मतदाता सूची से नाम हटने के आंकड़े अपने आप में अवैध विलोपन का प्रमाण नहीं हैं; विवाद प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर है।
CJP ने पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को शनिवार को हिरासत में लिए जाने के बाद रविवार को रिहा कर दिया गया था। रिहाई के बाद पार्टी ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। सोमवार को आशुतोष रांका और सौरव दास समेत CJP के नेता संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे। उन्होंने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की। नेताओं ने पुलिस को 24 घंटे का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में तारीख नहीं बताई गई तो पार्टी आगे के प्रदर्शन की घोषणा करेगी। इस बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से ही हटा दिया। इस तरह अब जंतर-मंतर पर कोई प्रदर्शन नहीं होगा। उसकी जगह रामलीला मैदान जाना होगा।
CJP ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित दर्जे से हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए। पुलिस ने पहले प्रस्तावित 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करते हुए कम समय में आवेदन दिए जाने का हवाला दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हिरासत का विवाद
प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर भी कानूनी सवाल उठे हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों के संबंध में कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया था। अदालत ने सार्वजनिक आवाजाही और न्यायालयों तक पहुंच बाधित न होने देने के महत्व को भी रेखांकित किया।
इसके बावजूद दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। माकपा सांसद जॉन ब्रिटास और प्रदर्शन कवर कर रहे कुछ पत्रकारों की हिरासत को लेकर भी सवाल उठे। ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और रिपोर्टिंग पर प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई। हालांकि, हिरासत और कथित दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों की शिकायतों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रशासन के दायित्व—दोनों को ध्यान में रखना होगा।
छह मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
विपक्ष के मार्च को देखते हुए दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी में लगभग 40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाई गई। दिल्ली मेट्रो ने सोमवार सुबह छह स्टेशनों—जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक और पटेल चौक—पर प्रवेश और निकास सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रखे। यात्रियों को यात्रा की योजना बदलनी पड़ी और मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ।
दिल्ली में जारी विरोध अब केवल चुनावी प्रक्रिया पर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक स्थलों के इस्तेमाल, पुलिस की शक्तियों और पत्रकारों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग से जुड़े सवाल भी शामिल हो गए हैं। मंगलवार की न्यायिक कार्यवाही और पुलिस का अगला कदम इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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