दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन जारी, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे राहुल गांधी; ममता बनर्जी भी होंगी शामिल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली में राजनीतिक टकराव लगातार तेज हो रहा है। 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद रविवार को भी राजधानी में विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी जारी रही।

इंडिया ब्लॉक प्रदर्शन के लिए तैयार
Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: October 12, 2026 12:18 am

इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और नेता आशुतोष रंका को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार, 12 अक्टूबर को विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और आम लोगों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की घोषणा की है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के भी इस प्रदर्शन में शामिल होने की खबर है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च

राहुल गांधी ने रविवार को घोषणा की कि सोमवार को विपक्षी दलों और लोकतंत्र तथा संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया जाएगा। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने की योजना है। विपक्ष की प्रमुख मांगों में कथित वोट चोरी पर रोक, SIR की प्रक्रिया रोकना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है।

ममता बनर्जी ने सोमवार के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली में रुकने का फैसला किया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के भी प्रदर्शन में शामिल होने की खबर है। विपक्ष इस मार्च के जरिए चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखना चाहता है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश से सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। हालांकि, रविवार देर रात तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया था। ऐसे में ज्ञापन सौंपने की योजना के बावजूद मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत मुलाकात होना सुनिश्चित नहीं है।

CJP के अलग आंदोलन में  बड़े पैमाने पर हिरासत

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी की मांग थी कि कथित चुनावी अनियमितताओं और SIR को लेकर उठाए गए सवालों पर कार्रवाई हो तथा मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें।

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। पुलिस का कहना था कि आवेदन निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप नहीं दिया गया था और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी थीं।

10 अक्टूबर को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को विमान से उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। राजधानी के विभिन्न इलाकों के अलावा गुरुग्राम और अन्य स्थानों पर भी राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। इनमें विपक्ष के कई नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल थे।

प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और अन्य विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की खबर आई। पुलिस की कार्रवाई के कारण मध्य दिल्ली में बैरिकेडिंग, यातायात प्रतिबंध और आवाजाही को लेकर परेशानियां सामने आईं।

CJP के तीनों नेता रिहा, जमानत बांड भरने के बाद मिली राहत

रविवार को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद तीनों को रिहा करने का आदेश दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शांति और सद्व्यवहार बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपये का जमानत बांड/जमानती बांड एक वर्ष की अवधि के लिए दाखिल किया गया था।

CJP ने तीनों नेताओं की रिहाई को अपनी बड़ी कानूनी जीत बताया। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की मांग करने वाले लोगों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर हिरासत की कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर सकता था, लेकिन इसके बजाय लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए।

रविवार को भी दिल्ली में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। राजीव चौक और कनॉट प्लेस के आसपास प्रदर्शन करने वाले छात्रों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका। वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों तथा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिए जाने की खबर आई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में न लें

दिल्ली में हिरासत, आवाजाही पर रोक और सार्वजनिक परिवहन संबंधी प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रविवार को विशेष सुनवाई हुई। अदालत ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।

अदालत ने दिल्ली मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को कानून-व्यवस्था संबंधी वैध जरूरतों के अधीन बाधित नहीं करने को कहा। अदालत ने वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर दायित्व निभाने से रोकने के मामले में भी सावधानी बरतने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान केंद्र से जवाब भी मांगा गया। मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि प्रदर्शन से पहले राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई थी और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई थीं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदर्शनकारियों की हिरासत और दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन तथा इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध को लेकर प्रशासन की कार्रवाई न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है।

दीपके की दादी की मौत पर पुलिस और CJP के बीच विवाद

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी के निधन को लेकर भी विवाद गहरा गया। दीपके के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें निधन की सूचना देने और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए घर जाने देने में देरी की। परिवार का कहना था कि बार-बार आग्रह के बावजूद उन्हें समय पर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक वीडियो जारी किया। पुलिस का कहना है कि दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी गई थी और घर जाने के लिए विमान, ट्रेन या बस की व्यवस्था करने तथा परिवार से संपर्क कराने की पेशकश की गई थी। पुलिस के अनुसार, दीपके ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।

हालांकि, दीपके ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने हिरासत के दौरान फोन के इस्तेमाल और वकीलों से संपर्क करने में कठिनाई होने की बात कही। इस तरह पुलिस के वीडियो के बाद भी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। वीडियो में दिखाई गई बातचीत के अलावा हिरासत के दौरान फोन, वकील और परिवार से संपर्क की परिस्थितियां भी इस विवाद का हिस्सा हैं। दीपके रविवार को रिहा होने के बाद महाराष्ट्र स्थित अपने घर के लिए रवाना हुए।

CJP ने आंदोलन आगे बढ़ाने का संकेत दिया

CJP ने रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने आंदोलन को जारी रखने की बात कही। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन ने उसके समर्थकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोकने के लिए व्यापक कार्रवाई की। नेताओं ने हिरासत के दौरान फोन ले लिए जाने और संबंधित दस्तावेज नहीं दिए जाने जैसी शिकायतें भी उठाईं।

CJP के अगले कार्यक्रम की तारीख और स्थान को लेकर अंतिम स्पष्टता सामने नहीं आई है। पार्टी नेताओं के सोमवार को दिल्ली पुलिस से संपर्क कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति और तारीख के संबंध में बात करने की योजना की खबर है। इसलिए CJP के अलग आंदोलन और INDIA गठबंधन के सोमवार के मार्च को एक ही कार्यक्रम मानना सही नहीं होगा।

दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने के आसार

10 अक्टूबर की हिरासत की घटनाओं, रविवार की रिहाई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सोमवार का दिन दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। एक ओर राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है, वहीं CJP अपने आंदोलन की अगली रणनीति पर आगे बढ़ सकती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR पर रोक और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की मांगें इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं। वहीं, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से इन आरोपों पर दिए गए जवाब तथा पुलिस की कार्रवाई का कानूनी आधार भी आगे की बहस में महत्वपूर्ण रहेगा।

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