ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे विपक्ष और सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे नेताओं के बीच शनिवार का प्रदर्शन अब केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव का नया मोर्चा बनता दिखाई दे रहा है। प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास बंद किए गए हैं, रेलवे ने बड़े पैमाने पर ट्रेनों को रद्द करने की घोषणा की है और पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया है, लेकिन आयोजकों ने विरोध जारी रखने का ऐलान किया है।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष की चार मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की।
विपक्ष के ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए और चुनाव आयुक्तों को आजीवन प्रतिरक्षा देने वाले 2023 के कानून को निरस्त किया जाए। दूसरी, एसआईआर तत्काल रोका जाए और विपक्ष के अनुसार अवैध रूप से हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं। तीसरी, चुनावों में मतपत्रों की व्यवस्था वापस लाई जाए। चौथी, पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों की समीक्षा या निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए, जिनमें विपक्ष कथित वोट चोरी के ठोस प्रमाण होने का दावा कर रहा है। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगा। उन्होंने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलने और ज्ञापन सौंपने की योजना भी बताई। विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष और उसके आदेशों की वैधानिक स्थिति इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ज्ञापन में लगाए गए आरोपों को अभी न्यायिक रूप से सिद्ध निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
केजरीवाल की घोषणा से प्रदर्शन को मिलेगा नया राजनीतिक आयाम
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को गोवा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वह शनिवार को अपने परिवार के साथ जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने लोगों से भी बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा के विरोध में मतदान करने वालों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और फर्जी वोट जोड़े जा रहे हैं। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
केजरीवाल की घोषणा से प्रदर्शन को विपक्ष के एक प्रमुख नेता का प्रत्यक्ष समर्थन मिल गया है। ऐसे समय में यह घोषणा महत्वपूर्ण है, जब इंडिया गठबंधन राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग कर चुका है और अब न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। शनिवार को जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़, विपक्षी दलों की भागीदारी और पुलिस की कार्रवाई से यह तय होगा कि यह विरोध कितना व्यापक रूप लेता है।
दिल्ली में सुरक्षा की किलेबंदी, 57 मेट्रो स्टेशनों पर रोक
प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पुलिस के अनुरोध पर शुक्रवार रात नौ बजे से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास बंद करने की घोषणा की। इनमें राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, जनपथ, मंडी हाउस, आईटीओ, दिल्ली गेट, खान मार्केट, नई दिल्ली और कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। प्रभावित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा सामान्यतः जारी रखने की बात कही गई है, जबकि नई दिल्ली स्टेशन पर यह अपवाद लागू है।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस का कहना है कि आयोजकों ने पूर्व के प्रदर्शनों में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया था और बड़े जमावड़े से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। मध्य दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधात्मक आदेश भी लागू किए गए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन से निपटने के लिए हजारों पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों को तैनात करने की तैयारी है। संवेदनशील इलाकों से भी अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए गए हैं। पुलिस के सामने चुनौती प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ सरकारी प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक परिवहन और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
रेलवे ने रद्द कीं सैकड़ों ट्रेनें, यात्रियों की परेशानी बढ़ी
प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ने की आशंका है। इंडियन एक्सप्रेस की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे ने नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन से संबंधित परिचालन में कम-से-कम 245 ट्रेनों को रद्द करने की जानकारी दी है। इनमें 75 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 170 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दो ट्रेनों के समय में बदलाव और नौ ट्रेनों को बीच के स्टेशनों पर समाप्त करने या वहीं से शुरू करने की व्यवस्था बताई गई है।
रेलवे ने इन कदमों के पीछे दिल्ली के प्रमुख स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम का हवाला दिया है। 10 अक्टूबर को सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली सेवाएं विशेष रूप से प्रभावित हैं। यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का नंबर डालकर आधिकारिक स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।
सरकार और विपक्ष के सामने शनिवार की परीक्षा
शनिवार का घटनाक्रम दो स्तरों पर महत्वपूर्ण होगा। एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता के सवाल को राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनाकर राष्ट्रपति भवन से सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, दिल्ली प्रशासन को प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच सार्वजनिक जीवन को यथासंभव सामान्य बनाए रखने की चुनौती का सामना करना है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मताधिकार प्रभावित हो रहे हैं। भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से इस विवाद पर रखे गए पक्ष, पुनरीक्षण के कानूनी आधार और मतदाता सूची से नाम हटाने के वास्तविक कारणों की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजर शनिवार के प्रदर्शन पर है। क्या जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों और युवाओं की बड़ी भागीदारी होगी? क्या प्रतिबंधों के बीच प्रदर्शन शांतिपूर्ण रह पाएगा? और क्या राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष की अगली रणनीति सुप्रीम कोर्ट में नए राजनीतिक और कानूनी टकराव का रास्ता खोलेगी? इन सवालों के जवाब शनिवार के घटनाक्रम से मिलेंगे।
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