तिरंगा मार्च के लिए निकले दीपके और नेहा बोरा समेत करीब 150 हिरासत में; पटना से केरल तक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शुरू हुआ विरोध शुक्रवार को कई राज्यों में तेज होता दिखाई दिया। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। ये प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने और ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने की कोशिश कर रहे थे।

Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: October 16, 2026 10:18 pm

उधर, बिहार की राजधानी पटना में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की ओर मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें आर-ब्लॉक के पास रोक दिया। केरल के पलक्कड़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।

अलग-अलग राज्यों में हुए इन प्रदर्शनों ने SIR, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है।

सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की कोशिश, दीपके और नेहा बोरा हिरासत में

दिल्ली में शुक्रवार का घटनाक्रम सुबह से ही तनावपूर्ण रहा। CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने के लिए ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम का आह्वान किया था। कार्यक्रम का उद्देश्य ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था।

दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कनॉट प्लेस, मंडी हाउस और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई तथा बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया। इसके बाद मंडी हाउस की ओर से कनॉट प्लेस पहुंचने की कोशिश कर रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और अन्य छात्र कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया।

विभिन्न समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की पहचान, उनके खिलाफ दर्ज मामलों और रिहाई की स्थिति का एकीकृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कनॉट प्लेस में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से उन्हें क्यों रोका जा रहा है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि अनुमति के बिना निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने से कानून-व्यवस्था और यातायात की समस्या उत्पन्न हो सकती थी।

पटना में SFI-DYFI का मार्च, आर-ब्लॉक पर पुलिस ने रोका

दिल्ली में कार्रवाई के बीच बिहार की राजधानी पटना में भी शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुआ। नेशनल हेराल्ड और इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्टों के मुताबिक, CPI(M), SFI और DYFI के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला।

प्रदर्शनकारी जीपीओ गोलंबर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ना चाहते थे। पुलिस ने आर-ब्लॉक के पास बैरिकेड लगाकर मार्च को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं और पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

इससे पहले 13 अक्टूबर को पटना में AISA और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के बैनर तले भी लोकभवन मार्च निकाला गया था। उस दौरान गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से आगे बढ़े प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच डाकबंगला चौराहे के पास तनाव की स्थिति बनी थी। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की थी और कई लोगों को हिरासत में लिया गया था।

इस प्रकार पटना में अलग-अलग वामपंथी छात्र और युवा संगठनों के प्रदर्शनों ने SIR के मुद्दे को बिहार की राजनीति में भी प्रमुखता से उठा दिया है।

केरल के पलक्कड़ में ज्ञानेश कुमार की प्रतीकात्मक शवयात्रा

केरल के पलक्कड़ से सामने आई एक अन्य खबर ने इस विवाद को नया राजनीतिक आयाम दिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर के साथ प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली। प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ नारेबाजी की गई और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर नाराजगी जताई गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, पलक्कड़ में कांग्रेस की स्थानीय इकाई के कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार जैसा कार्यक्रम आयोजित किया। यह प्रदर्शन SIR की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के प्रति असंतोष जताने के लिए किया गया था।

प्रतीकात्मक शवयात्रा जैसे विरोध के तरीके ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। हालांकि, विरोध के इस तरीके को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके तरीकों और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति राजनीतिक व्यवहार पर भी बहस जारी रहना स्वाभाविक है।

SIR पर विवाद का केंद्र क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। लेकिन विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में नाम हटाए जाने, दस्तावेजों की उपलब्धता और पात्र मतदाताओं के मताधिकार पर असर पड़ने की आशंका है।

इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की ओर से चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में विवाद का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मतदाता सूची से जुड़े आरोपों और आशंकाओं की जांच पारदर्शी तरीके से हो तथा पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें।

आंदोलन का अगला चरण क्या होगा?

दिल्ली में CJP और छात्र संगठनों की कार्रवाई, पटना में वामपंथी संगठनों के मार्च और केरल में कांग्रेस के प्रतीकात्मक विरोध से स्पष्ट है कि SIR का मुद्दा अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। यह चुनाव आयोग की जवाबदेही, विपक्ष के विरोध के अधिकार और प्रशासन द्वारा प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के तरीकों से भी जुड़ गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाते हैं या अलग-अलग राज्यों में अपने स्तर पर विरोध जारी रखते हैं। साथ ही, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की स्थिति, पुलिस की आगे की कार्रवाई और SIR पर न्यायिक तथा निर्वाचन आयोग के स्तर पर होने वाली सुनवाई भी राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल दिल्ली से पटना और पलक्कड़ तक सामने आए घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर राजनीतिक टकराव थमने के बजाय और व्यापक हो सकता है।

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