कोलकाता के दुर्गा पंडाल में भगदड़ से 19 मरे, 35 घायल

कोलकाता में दुर्गा पूजा के उल्लास के बीच शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में भारी भीड़ और बारिश के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। महिलाओं और बच्चों सहित 19 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोगों के घायल हैं। 

Written By : डेस्क | Updated on: October 17, 2026 11:28 pm

हादसे के बाद घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल अस्पताल पहुंचे तथा घायलों की स्थिति की जानकारी ली। पुलिस, आपदा प्रबंधन कर्मियों और स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। हादसे के कारणों की जांच के बीच भीड़ नियंत्रण, प्रवेश-निकास की व्यवस्था और आयोजकों की तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बारिश, भीड़ का दबाव और अचानक मची अफरा-तफरी

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सप्तमी की शाम चोरबागान के पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश के कारण भीड़ का दबाव बढ़ा और पंडाल के एक हिस्से अथवा निकास द्वार के पास अव्यवस्था की स्थिति बन गई। कुछ रिपोर्टों में पंडाल के हिस्से के ढहने की बात कही गई है, जबकि अन्य में निकास द्वार के पास भीड़ के दबाव का उल्लेख है। हादसे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से सामने आई कुछ खबरों में रास्ते की संकरी जगह और पर्याप्त रोशनी नहीं होने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। लेकिन यदि भीड़ के दबाव, बारिश और निकास व्यवस्था की समस्या ने मिलकर हालात बिगाड़े, तो यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना के अनुरूप सुरक्षा योजना बनाई गई थी या नहीं।

कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में घायलों का इलाज

हादसे के बाद घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। मीडिया रिपोर्टों में अस्पताल पहुंचाए गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में 35 से अधिक घायलों का उल्लेख है, जबकि अन्य में इससे अधिक लोगों के अस्पताल पहुंचने की आशंका जताई गई है। कई घायलों की हालत गंभीर होने की खबरें भी सामने आई हैं।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति का जायजा लिया। ऐसे हादसों में शुरुआती घंटों के दौरान घायलों की संख्या और उनकी स्थिति बदल सकती है। इसलिए मृतकों और घायलों के अंतिम आंकड़े की पुष्टि अस्पताल तथा प्रशासन की आधिकारिक जानकारी से किया जाना जरूरी है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने हादसे से संबंधित जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी की है। प्रशासन के सामने अब घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने, प्रभावित परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने और लापता लोगों के संबंध में सूचनाओं का समन्वय करने की चुनौती है।

पंडाल बंद, पुलिस तैनात; राहत कार्य जारी

हादसे के बाद सुरक्षा की दृष्टि से पंडाल में श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पंडाल की रोशनी भी बंद कर दी गई और पुलिस तथा आपदा प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने और राहत कार्य के लिए प्रशासन ने कार्रवाई की। जांच की  जा रही है कि पंडाल और उसके अस्थायी ढांचे की सुरक्षा संबंधी जांच हुई थी या नहीं, भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी किन अधिकारियों और आयोजकों को दी गई थी तथा मौके पर उपलब्ध इंतजाम वास्तविक भीड़ के अनुपात में पर्याप्त थे या नहीं।

प्रशासन और आयोजकों की जवाबदेही तय करना जरूरी

दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं होती। आयोजकों, स्थानीय प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होता है। भीड़ का अनुमान, प्रवेश-निकास की स्पष्ट व्यवस्था, आपातकालीन रास्ते, पर्याप्त रोशनी, प्रशिक्षित स्वयंसेवक और चिकित्सा सहायता ऐसी तैयारियों का अहम हिस्सा हैं।

चोरबागान हादसे के बाद जांच का केंद्र यह होना चाहिए कि निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और यदि नहीं, तो कहां कमी रह गई। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, भविष्य में दुर्गा पूजा के शेष दिनों और दूसरे बड़े आयोजनों के लिए भीड़ प्रबंधन की समीक्षा जरूरी है, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

उत्सव के बीच परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़

दुर्गा पूजा बंगाल में केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवारों और समुदायों के मिलन का अवसर भी है। लोग बच्चों और बुजुर्गों के साथ पंडालों में दर्शन करने निकलते हैं। ऐसे में जिस जगह लोग श्रद्धा और खुशी के साथ पहुंचे हों, वहीं अचानक अफरा-तफरी में अपनों से बिछड़ना, चोटिल होना या किसी प्रियजन को खो देना परिवारों के लिए असहनीय पीड़ा बन जाता है।

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