लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में तीसरी सोमवारी पर भगदड़, 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत

बिहार के लखीसराय जिले में सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोकधाम मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ के बीच सोमवार सुबह भगदड़ मचने से सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। घायलों की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में अलग बताई गई है, लेकिन प्रशासन की शुरुआती जानकारी में कम से कम 19 घायलों की पुष्टि हुई है जिनमें 5 की हालत गंभीर है।

घायलों का चल रहा इलाज
Written By : डेस्क | Updated on: August 17, 2026 11:01 pm

हादसा सुबह करीब साढ़े छह बजे अशोकधाम हॉल्ट से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर हुआ। सावन की सोमवारी के कारण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान दो ट्रेनों के हॉल्ट पर रुकने से अचानक भीड़ का दबाव और बढ़ गया। प्रशासन के अनुसार, पुरुष श्रद्धालुओं की कतार के पास एक बिजली का खंभा गिर गया। इसके बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि बिजली का तार गिर गया है और करंट फैल गया है। अफरा-तफरी में महिलाओं की कतार पर दबाव बढ़ा और कई श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गिर गए।

जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार के मुताबिक, खंभे से गिरा तार बिजली का लाइव वायर नहीं, बल्कि केबल था। अफवाह फैलने के बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि करीब दो मिनट के भीतर भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। प्रशासन के अनुसार बैरिकेडिंग का एक हिस्सा भीड़ के दबाव में टूट गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमों ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि मंदिर के आसपास पहले से पुलिस और एंबुलेंस की व्यवस्था थी, जिसके कारण घायलों को उपचार के लिए तेजी से भेजा जा सका। हादसे के कारणों और मौके की सुरक्षा व्यवस्था की जांच भी शुरू कर दी गई है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के निकटतम आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। राज्य सरकार ने घायलों के समुचित इलाज का निर्देश दिया है।

हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शोक जताया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद में जुटा है। राष्ट्रपति ने भी घटना को पीड़ादायक बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह भी देख रहा है कि भारी भीड़ के बीच दो ट्रेनों के एक साथ आने और मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर अचानक बढ़े दबाव से पैदा हुई स्थिति को समय रहते क्यों नहीं संभाला जा सका।

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