देवेश जी इस कोष में सिर्फ हिन्दी रचनाकारों को ही शामिल किया है. ध्यातव्य है कि कोसी क्षेत्र में बांग्ला, मैथिली, अंग्रेजी, उर्दू इत्यादि भाषाओं के भी बहुत सारे ख्याति प्राप्त लेखक हुए हैं. देवेश जी आगे के खण्डों में उन साहित्यकारों पर चर्चा करेंगे. चार सौ बारह पृष्ठों के इस सन्दर्भ ग्रंथ में शायद ही कोई चर्चित हिन्दी लेखक छूट पाया हो पर फिर भी देवेश पुस्तक के प्रारंभ में अपनी बात रखते हुए कहते हैं कि आगे के संस्करणों में कुछ महत्वपूर्ण छूटे हुए रचनाकारों को भी शामिल किया जाएगा.
पुस्तक के प्रारंभ में ‘प्राक्कथन’ में देवेश जी कहते हैं, ‘….नए परिचय जोड़ने का सिलसिला और अधूरे परिचयों को पूरा करने का प्रयास मुद्रण के लिए पुस्तक को अंतिम रूप देने तक जारी रहा है, तथापि इस कार्य को संपूर्णता नहीं मिली है. मित्रों का परामर्श हुआ कि इस तरह के कार्य को कभी भी सम्पूर्णता नहीं मिलती, इसलिए इसे एक संतोषजनक रूप प्रदान कर प्रकाशित करा दिया जाना उचित होगा. इसी परामर्श को ध्यान में रखकर यह संस्करण आपके हाथों में सौंप रहा हूं. सुधी पाठकों और अंचल के लेखकों का पर्याप्त सहयोग, सुझाव और यथोचित सूचनाएँ इस वर्ष के अंत तक यानी दिसम्बर 2026 तक प्राप्त होने पर 2027 की जनवरी में इसका संशोधित संस्करण अवश्य प्रकाशित करने का विचार रहेगा. कोष का अध्ययन करते हुए आप सभी देख पाएंगे कि यह अधूरापन इस रूप में है कि कुछेक लेखकों के जन्म, मृत्यु, शिक्षा, प्रकाशित पुस्तकों के नाम, उनके प्रकाशन के वर्ष आदि उपलब्ध नहीं हो पाए !…’
पुस्तक की विस्तृत भूमिका में देवेश जी ने कोसी क्षेत्र के पौराणिक काल से आधुनिक काल तक की परम्परा की चर्चा की है. इस पुस्तक में लगभग सभी लेखकों, कवियों, कथाकारों, उपन्यासकारों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है. यह पोथी गंभीर पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए एक अति महत्पूर्ण सन्दर्भ ग्रंथ साबित होगी. पुस्तक के अंत में सन्दर्भों की पूरी सूची संलग्न है. पुस्तक की छपाई अति सुन्दर है. प्रिंटिंग मे भी पूरी सावधानी बरती गई है. पुस्तक अति पठनीय और संग्रहणीय है.
पुस्तक : कोसी (शोध- साहित्य- सन्दर्भ-कोश /हिन्दी लेखक परिचय खंड)-( Hard bound) लेखक/सम्पादक: डॉ. देवेन्द्र कुमार देवेश. पृष्ठ: 412. प्रकाशक: विजया बुक्स, नई दिल्ली, प्रकाशन वर्ष:2026, मूल्य: रू. 995/_

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)
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