राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ बड़ी महारैली कर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ सियासी मोर्चा खोल दिया। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी, बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई बताया, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक हताशा का प्रदर्शन करार देते हुए रैली की भीड़ पर सवाल खड़े किए।
रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एकत्र होकर वहां से खुली गाड़ी में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च निकाला। मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के रास्ते रामलीला मैदान पहुंचे इस मार्च में विभिन्न विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। आयोजकों ने रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई थी, जबकि दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों का था। आयोजन के मद्देनजर मैदान और आसपास के इलाकों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
राहुल गांधी का सबसे तीखा हमला, ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की चेतावनी
रैली में राहुल गांधी का भाषण सबसे अधिक चर्चा में रहा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश के मतदाताओं के अधिकारों को छीना जा रहा है और चुनावी प्रक्रिया के जरिए लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव को ‘चोरी का चुनाव’ बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने यहां तक कहा कि ज्ञानेश कुमार को जेल जाना होगा। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कथित वोट चोरी से सत्ता में बने रहने का रास्ता तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस मामले में न्याय लेकर रहेगी।
खरगे ने मोदी-शाह पर लगाया वोट छीनने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर महिलाओं, युवाओं और दलितों के वोट छीनने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की रक्षा की ऐतिहासिक लड़ाई है और जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद से नहीं हटते, विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा। खरगे ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की।
ममता बनर्जी ने बंगाल का मुद्दा उठाया, भाजपा को सत्ता से हटाने की चुनौती
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने भाषण में पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने SIR को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को सत्ता से जाना होगा। ममता ने युवाओं के आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभियान को भी समर्थन दिया।
अखिलेश यादव और तेजस्वी ने भी साधा निशाना
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर वोट चोरी और चंदा चोरी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में परिवर्तन की स्थिति बन रही है और युवा कथित अन्याय का जवाब देंगे। उन्होंने मतदाता सूची में नाम कटने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में महाभारत का उल्लेख करते हुए रामलीला मैदान को कुरुक्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष करना होगा। तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग भी की।
अन्य विपक्षी नेताओं ने भी उठाए सवाल
रैली में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, कांग्रेस सांसद शशि थरूर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी संबोधित किया। महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर अयोध्या में राम मंदिर के चंदे को लेकर आरोप लगाए। शशि थरूर ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जनता की आवाज सुनने की अपील की, जबकि संजय राउत ने इसे देश में राजनीतिक परिवर्तन की शुरुआत बताया।
भाजपा ने वीडियो जारी कर बताया फ्लॉप शो
विपक्ष की महारैली समाप्त होते ही भाजपा ने उस पर तीखा हमला बोला। भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि कांग्रेस ने 10 लाख लोगों के जुटने की बात कही थी, लेकिन रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली थीं। उन्होंने कहा कि मैदान में लगाई गई लगभग 28 हजार कुर्सियों में से दोपहर साढ़े तीन से चार बजे के बीच करीब पांच से सात हजार कुर्सियां खाली थीं। भाजपा ने राहुल गांधी के भाषण के दौरान खाली कुर्सियों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया।
संबित पात्रा ने राहुल गांधी से सवाल किया कि यदि 2024 का चुनाव अवैध था तो उन्होंने इसके खिलाफ तत्काल कानूनी याचिका क्यों नहीं दाखिल की। भाजपा ने रैली को फ्लॉप शो बताते हुए विपक्ष पर चुनावी हार की हताशा में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण
विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग का पक्ष इससे अलग है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य दोहरे, मृत और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को शुद्ध करना है। आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
मतदाता सूची में हुए संशोधनों के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का मुद्दा विपक्ष के विरोध का प्रमुख आधार बना है। विपक्ष का आरोप है कि इसका असर अल्पसंख्यकों और सरकार के विरोध में मतदान करने वाले वर्गों पर अधिक पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों और नाम हटाए जाने के कारणों को लेकर चुनाव आयोग तथा विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं।
एक मंच पर विपक्ष, लेकिन एकजुटता की परीक्षा बाकी
रामलीला मैदान की इस महारैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और वामपंथी दलों सहित विपक्ष के कई घटक दलों के नेता शामिल हुए। आयोजकों ने 23 दलों की भागीदारी की बात कही। हालांकि विपक्ष के सभी प्रमुख दल इस आयोजन में शामिल नहीं हुए। ऐसे में इस रैली को INDIA गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन तो माना जा सकता है, लेकिन इसे स्थायी राजनीतिक एकता में बदलना विपक्ष के सामने बड़ी चुनौती होगी।
राजनीतिक संदेश और आगे की चुनौती
रामलीला मैदान की महारैली ने एक बार फिर चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। राहुल गांधी ने जहां सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाने पर लेकर आंदोलन को आक्रामक तेवर दिए, वहीं ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने अपने-अपने राज्यों के राजनीतिक संदर्भों को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की।
दूसरी तरफ भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा बताते हुए रैली की भीड़ और राहुल गांधी के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रामलीला मैदान की यह महारैली विपक्ष को एक स्थायी राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे पाएगी या फिर यह केवल एक दिन का राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन बनकर रह जाएगी? आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की रणनीति और SIR को लेकर उठने वाले राजनीतिक तथा कानूनी कदम इस सवाल का जवाब देंगे।
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