पीएम नरेंद्र मोदी के गढ़ वाराणसी में भाजपा को झटका, RSS मुख्यालय नागपुर में कांग्रेस ने बचाई प्रतिष्ठा

चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों में एनडीए को 15 पर जीत; वाराणसी की दोनों सीटें सपा के खाते में, बिहार में राजद की दो सीटों पर वापसी और कर्नाटक में कांग्रेस का सफाया.

Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: October 29, 2026 11:55 pm

चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 28 में से 15 सीटें जीतकर बढ़त हासिल की है। हालांकि, इन नतीजों में भाजपा के लिए कुछ अहम राजनीतिक झटके भी छिपे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों विधान परिषद सीटों पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय नागपुर में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर अपनी प्रतिष्ठा बचाई। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की दो सीटों पर जीत और कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस का चारों सीटें हार जाना भी चुनाव के प्रमुख परिणाम रहे।

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया। नागपुर आरएसएस का मुख्यालय होने के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। इस कारण कांग्रेस की जीत को प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा ने चारों राज्यों में सबसे अधिक 12 सीटें जीतीं। उसके सहयोगियों की तीन सीटें जोड़ने पर एनडीए की कुल संख्या 15 पहुंच गई।‎

वाराणसी में दोनों सीटें हारना भाजपा के लिए बड़ा झटका

उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों में भाजपा ने छह और सपा ने पांच सीटें जीतीं। कुल सीटों के मामले में भाजपा आगे रही, लेकिन वाराणसी की दोनों सीटों पर हार ने चुनाव परिणामों को राजनीतिक रूप से खास बना दिया।

वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की। वहीं, वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को हराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी की दोनों सीटों पर भाजपा की हार को राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सामान्य लोकसभा या विधानसभा चुनावों के मतदाताओं से अलग होते हैं। इसलिए इन नतीजों को पूरे वाराणसी के जनमत का सीधा प्रतिबिंब मानना उचित नहीं होगा। फिर भी स्थानीय स्तर पर भाजपा के सामने संगठन और मतदाताओं के साथ संवाद को मजबूत करने की चुनौती जरूर सामने आई है।

लखनऊ में भी सपा की जीत, लेकिन भाजपा ने एक सीट बचाई

उत्तर प्रदेश में लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा की कांति सिंह ने भाजपा उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की। लखनऊ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संसदीय क्षेत्र है। इस लिहाज से यहां सपा की सफलता भी चर्चा में रही।

हालांकि, लखनऊ की दोनों सीटों पर भाजपा को हार नहीं मिली। लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के उमेश द्विवेदी ने जीत हासिल की। इस तरह लखनऊ में भाजपा एक सीट जीतने में सफल रही, जबकि दूसरी सीट सपा के खाते में गई।

प्रयागराज-झांसी स्नातक और आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी सपा को सफलता मिली। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में भाजपा छह सीटों के साथ सबसे आगे रही। इन परिणामों से स्पष्ट है कि सपा ने कई क्षेत्रों में भाजपा को कड़ी चुनौती दी, लेकिन राज्य में भाजपा की समग्र बढ़त बनी रही।

कर्नाटक में कांग्रेस का सफाया, भाजपा-जद(एस) ने जीतीं चारों सीटें

कर्नाटक में कांग्रेस को चुनावी झटका लगा। राज्य की चारों विधान परिषद सीटें भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) यानी जद(एस) गठबंधन के खाते में गईं। भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि जद(एस) को एक सीट पर सफलता मिली।

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जद(एस) के ए. पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया। भाजपा ने अन्य तीन सीटों पर जीत दर्ज की। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी इन चारों सीटों में से एक भी नहीं जीत सकी।

यह परिणाम कांग्रेस के लिए संगठनात्मक चुनौती की ओर संकेत करता है। दूसरी ओर, भाजपा और जद(एस) ने शिक्षक-स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत दिखाई। हालांकि, इन चार सीटों के परिणामों को पूरे कर्नाटक में सरकार के प्रति जनसमर्थन का सीधा आकलन नहीं माना जा सकता।

बिहार में राजद की दो सीटें, जन सुराज ने भी खोला खाता

बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के अंतिम परिणामों में राजद ने दो सीटें जीतीं। इनमें पटना शिक्षक और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। दरभंगा स्नातक सीट पर मतगणना के दौरान परिणाम को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही, लेकिन अंतिम नतीजे में राजद के अनिल कुमार झा ने भाजपा के सर्वेश कुमार को 450 मतों से हरा दिया।

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद के डॉ. संजीव कुमार सिंह ने भाजपा के नवल किशोर यादव को पराजित किया। इन दोनों जीतों के साथ राजद ने बिहार में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाया और भाजपा को दो महत्वपूर्ण सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को 324 मतों से हराया। इस जीत से जन सुराज ने विधान परिषद में अपना खाता खोला। पार्टी के लिए यह उल्लेखनीय सफलता है

अन्य सीटों पर भाजपा ने तिरहुत शिक्षक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। जदयू के नीरज कुमार ने पटना स्नातक सीट बरकरार रखी, जबकि तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते।

इस प्रकार बिहार की आठ सीटों में भाजपा को दो, जदयू को एक, राजद को दो, जन सुराज को एक और निर्दलीय उम्मीदवारों को दो सीटें मिलीं। एनडीए को कुल तीन सीटें हासिल हुईं। राजद की दो सीटों पर वापसी और जन सुराज की पहली जीत ने बिहार के परिणामों को खास बना दिया।

नागपुर में कांग्रेस की जीत ने बढ़ाया राजनीतिक महत्व

महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों में विपक्षी महा विकास आघाड़ी ने तीन और सत्तारूढ़ महायुति ने दो सीटें जीतीं। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया। वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले को 63,960 मत प्राप्त हुए।

नागपुर आरएसएस का मुख्यालय है और भाजपा के प्रमुख नेताओं देवेंद्र फडणवीस तथा नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे शहर में कांग्रेस का अपनी सीट बरकरार रखना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता है। इस जीत से कांग्रेस को यह संदेश देने का अवसर मिला कि भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में भी विपक्ष मुकाबला कर सकता है।

महाराष्ट्र की अन्य सीटों पर भाजपा ने पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अमरावती शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सफलता हासिल की। इस तरह महा विकास आघाड़ी ने पांच में से तीन सीटें जीतकर बढ़त बनाई।

चार राज्यों की 28 सीटों का पार्टीवार परिणाम

दल         सीटें

भाजपा        12

जनता दल (यूनाइटेड ) 1

जनता दल (सेक्युलर).  1

शिवसेना  1

समाजवादी पार्टी  5

कांग्रेस  1

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)  2

राष्ट्रीय जनता दल  2

जन सुराज  1

निर्दलीय   2

कुल.   28

इस हिसाब से भाजपा की 12 सीटों के साथ जदयू, जद(एस) और शिवसेना की एक-एक सीट जोड़ने पर एनडीए की कुल संख्या 15 होती है। अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मिलकर 13 सीटें जीतीं।

भाजपा की बढ़त, लेकिन विपक्ष की चुनिंदा क्षेत्रों में सफलता

चार राज्यों के नतीजे भाजपा और एनडीए की समग्र हार की कहानी नहीं हैं। एनडीए ने कुल 28 में से 15 सीटें जीतीं और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। लेकिन वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा की जीत, नागपुर में कांग्रेस की सफलता, बिहार में राजद की दो सीटों पर वापसी और कर्नाटक में कांग्रेस का सफाया अलग-अलग राजनीतिक संकेत देते हैं।

भाजपा के लिए सबसे बड़ा प्रतीकात्मक झटका वाराणसी की दोनों सीटों पर हार है, जबकि कांग्रेस के लिए नागपुर की जीत राहत लेकर आई। बिहार में राजद ने अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाया और जन सुराज ने पहली बार विधान परिषद में जगह बनाई। कर्नाटक में कांग्रेस की हार ने राज्य में स्थानीय चुनावी संगठन की स्थिति पर सवाल खड़े किए।

इन परिणामों का विश्लेषण करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सीमित और विशिष्ट समूहों से आते हैं। इसलिए इन नतीजों को लोकसभा या विधानसभा चुनावों का सीधा पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता। फिर भी वे स्थानीय नेतृत्व, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत की परीक्षा जरूर हैं।

ये भी पढ़ें:-अनंत सिंह 6 साल के लिए जदयू से निष्कासित, विधायकी खत्म करने की भी अनुशंसा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *