अमेरिका-इज़राइल ने किया ईरान पर बड़ा हमला, ईरान ने 8 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

महीनों से सुलग रहे तनाव ने शनिवार को खुले युद्ध का रूप ले लिया जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर संयुक्त सैन्य अभियान शुरू कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ( Donald Trump) ने “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन्स” की घोषणा करते हुए इसे निर्णायक कार्रवाई बताया, जबकि तेहरान में कई ठिकानों पर भीषण धमाकों और धुएँ के गुबार की तस्वीरें सामने आईं।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: March 1, 2026 12:01 am

अमेरिका और इसराइल की ओर से चलाए जा रहे अभियान में तेहरान, इस्फहान, क़ोम और करज सहित कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबर है। हमलों का फोकस सैन्य ढांचे, मिसाइल ठिकानों और कमांड सिस्टम पर बताया जा रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई (Ali Khamenei) को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की सूचना है।

ईरान का पलटवार, खाड़ी क्षेत्र में अलर्ट

हमले के कुछ घंटों के भीतर ही ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब सहित खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी नौसेना की 5वीं फ्लीट से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट है। क्षेत्र के कई देशों ने एयरस्पेस पर निगरानी बढ़ा दी है और सैन्य अलर्ट जारी कर दिया गया है।

तेहरान और अन्य शहरों में दहशत का माहौल है। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, लोग सुरक्षित इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं और इंटरनेट सेवा में भारी व्यवधान की खबर है। संचार बाधित होने से हालात की सटीक तस्वीर सामने आने में कठिनाई हो रही है।

वैश्विक असर: बाजार डगमगाए, कूटनीति सक्रिय

युद्ध की खबर के साथ ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता देखी गई। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया है। ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है।

दुनिया भर में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। कई देशों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है और सयुक्त राज्य सुरक्षा परिषद ( United Nations Security Council) की आपात बैठक बुलाने की मांग की है

आगे क्या?

स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। दोनों पक्षों ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। यदि सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ता है तो यह टकराव क्षेत्रीय युद्ध से वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। मध्य पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है—और दुनिया की निगाहें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं।

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