अमेरिका के बहिष्कार के बीच G20 में शुरुआती चरण में ही बनी आम सहमति

जोहान्सबर्ग में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में इस बार एक असामान्य घटना देखने को मिली। अमेरिका के बहिष्कार (बॉयकॉट) के बीच वैश्विक नेताओं ने परंपरा तोड़ते हुए बैठक के समापन से पहले ही सर्वसम्मति से लीडर्स’ डिक्लेरेशन को मंजूरी दे दी। दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय एकजुटता, समानता और स्थिरता रहा।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: November 23, 2025 12:40 am

अमेरिका की G20 में गैर-मौजूदगी और ‘अर्ली कंसेंसस’

अमेरिका द्वारा शीर्ष स्तर का प्रतिनिधिमंडल न भेजे जाने के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि डिक्लेरेशन पर सहमति मुश्किल हो सकती है। इसके बावजूद अधिकांश सदस्य देशों ने दक्षिण अफ्रीका के प्रस्तावों का समर्थन किया और प्रारम्भिक चरण में ही घोषणापत्र को स्वीकृति दे दी। कूटनीतिक हलकों में इसे ग्लोबल साउथ की प्रभावी उपस्थिति के रूप में देखा जा रहा है।

घोषणापत्र में जलवायु संकट, खाद्य सुरक्षा, कर्ज दबाव (debt distress), सामाजिक-आर्थिक असमानता और विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई। दक्षिण अफ्रीका ने इसे “ऐतिहासिक सहमति” करार दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख बातें

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक विकास मॉडल ने दुनिया की बड़ी आबादी को संसाधनों से वंचित किया है, और पृथ्वी पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब समय है कि दुनिया “नए, समावेशी और सतत विकास मॉडल” की ओर बढ़े।

मोदी ने तीन प्रमुख पहलें सामने रखीं:

1) समावेशी विकास और स्किल-फोकस

मोदी ने कहा कि तकनीक और कौशल पर आधारित अवसरों को ग्लोबल साउथ तक पहुंचाना जरूरी है। दुनिया की प्रगति तभी संभव है जब विकास “समावेशी” हो।

2) खाद्य सुरक्षा और भारत की डेकेन प्रिंसिपल्स

खाद्य सुरक्षा को लेकर भारत ने पिछली बैठकों में जो Deccan Principles रखी थीं, मोदी ने उन्हें आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और युद्धों के बीच गरीब देशों की भोजन सुरक्षा सबसे गंभीर चुनौती है।

3) ड्रग-टेरर कनेक्शन पर वैश्विक कार्रवाई

मोदी ने आतंकवाद और ड्रग-नेटवर्क के गठजोड़ को “वैश्विक खतरा” बताते हुए कहा कि इस पर संयुक्त कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों का नेटवर्क युवाओं को बर्बाद कर रहा है और इसकी फंडिंग से आतंकवाद मजबूत होता है।

भारत की सक्रिय भूमिका

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया। ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस सहित कई देशों के नेताओं से उनकी मुलाकात हुई, जिसमें रक्षा-साझेदारी, व्यापार, जलवायु सहयोग और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने इस बार भी विकासशील देशों की आवाज उठाने की भूमिका निभाई। बैठक में भारत की ओर से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आपदा प्रबंधन और जलवायु वित्त जैसे विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

अमेरिका के बहिष्कार के बावजूद G20 बैठक में प्रारम्भिक चरण में ही सर्वसम्मति बन जाना वैश्विक कूटनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन आने वाले वर्षों की वैश्विक नीति-दिशा पर प्रभाव डाल सकता है।

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