तीन-दिवसीय ‘अयोध्या पर्व’ कार्यक्रम के पहले दिन, 3 अप्रैल को पूर्वाह्न 11 बजे ‘भविष्य की अयोध्या – नगर योजना’ विषय पर विमर्श सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और विद्वान अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इसी दिन अपराह्न 3 बजे उद्घाटन सत्र आयोजित होगा, जिसमें अयोध्या की श्री मणिरामदास छावनी के महंत कमल नयन दास जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं मार्गदर्शक सुरेश भैयाजी जोशी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री राजकुमारी दीया कुमारी तथा आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय और सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
तीन दिवसीय आयोजन के दौरान अयोध्या के धरोहर स्थलों की प्रदर्शनी, संतों का आशीर्वचन, प्रबुद्ध जन के उद्बोधन तथा विविध विमर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें ‘शबरी के राम’, ‘पं. रामकिंकर उपाध्याय की दृष्टि में रामराज्य का भाव’, ‘भविष्य की अयोध्या – शासन और समाज’ जैसे विषयों पर विचार-विमर्श शामिल। इसके साथ ही, आध्यात्मिक संगीत, शास्त्रीय प्रस्तुतियां और लोककलाओं का प्रदर्शन इस सांस्कृतिक उत्सव को आकर्षण प्रदान करेंगे। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ‘गीत रामायण’ पर आधारित प्रस्तुतियां, नाट्य मंचन तथा लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां इस आयोजन को सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध करेंगी। आयोजन स्थल पर अवधी हाट का भी आयोजन किया जाएगा, जहां पारम्परिक व्यंजन एवं स्थानीय शिल्प का अनुभव प्राप्त होगा।
यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि अयोध्या को एक जीवंत सांस्कृतिक विमर्श के रूप में समझने, उसके बहुस्तरीय स्वरूप पर विचार करने तथा उसे समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, विद्वानों, नीति-निर्माताओं, कलाकारों एवं जनप्रतिनिधियों की व्यापक सहभागिता होगी। इस कार्यक्रम के संयोजक फैज़ाबाद के पूर्व सांसद लल्लू सिंह हैं।
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