सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और परीक्षा प्रक्रिया की अंदरूनी जानकारी रखता था। आरोप है कि उसने परीक्षा से पहले चुनिंदा छात्रों को “गेस पेपर” और प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराए। इसके बदले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से लाखों रुपये वसूले गए।
जांच एजेंसियों के मुताबिक अप्रैल के अंतिम सप्ताह में पुणे स्थित उसके ठिकाने पर विशेष क्लास आयोजित की गई थी। यहां छात्रों को संभावित प्रश्नों के साथ उत्तर भी बताए गए। बाद में जब वास्तविक प्रश्नपत्र सामने आया तो कई सवाल हूबहू मेल खाते पाए गए। इसी आधार पर सीबीआई को प्रोफेसर कुलकर्णी तक पहुंचने में सफलता मिली।
सूत्रों के अनुसार कुलकर्णी केवल अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि उसके संपर्क राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और महाराष्ट्र के कई कोचिंग संचालकों तथा बिचौलियों से जुड़े हुए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित “गेस पेपर” के नाम पर 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की डील की गई।
इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। महाराष्ट्र से मनीषा वाघमारे और नासिक निवासी शुभम खैरनार को पकड़ा गया है, जबकि राजस्थान के जयपुर से बिवाल परिवार के तीन सदस्यों को हिरासत में लिया गया। गुरुग्राम और अहिल्यानगर से भी कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। सीबीआई ने कई शहरों में छापेमारी कर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप और हस्तलिखित नोट्स बरामद किए हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले किस स्तर पर लीक हुआ और क्या राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) या उससे जुड़े किसी कर्मचारी की भूमिका भी इसमें रही।
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