Cryptocurrency कैसे बना अमेरिकी चुनाव का मुद्दा, ट्रंप को क्यों मिला समर्थन?

Donald Trump को गोली लगने के बाद उनके इलेक्शन जीतने की संभावनाएं काफी बढ़ गई. ट्रंप को गोली लगने के बाद से बिटकॉइन साथ बाकी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) की कीमत में लगातार तेजी देखने को मिल रही है.ट्रंप को गोली लगने से पहले बिटकॉइन 58 हजार डॉलर पर था. शनिवार को घटना के बाद दाम 60 हजार डॉलर के पार चले गए. मंगलवार तक आते-आते इसमें 7 हजार डॉलर तक का इजाफा देखने को मिल चुका है.

Written By : वेदिका वशिष्ठ | Updated on: July 17, 2024 10:48 am

Cryptocurrency : ऐसा सिर्फ भारत में हो सकता है या तो या अमेरिका में. लोकसभा चुनाव के दौरान भारत में संविधान कब चुनावी मुद्दा बन गया सत्ता पक्ष को इस बात का पता ही नहीं चला. उसके बाद जब राहुल गांधी और उनके खड़े विपक्ष के बाकी नेता संविधान की लाल किताब को सड़कों पर आम लोगों के बीच लेकर निकले तो चुनावी परिणाम चौंकाने वाले रहे. अमेरिका में भी वैसा ही हो रहा है. अमेरिका में क्रिप्टो करेंसी (Cryptocurrency) एक चुनावी मुद्दा भी बन सकता है इसके बारे में अमेरिका तो क्या दुनिया के किसी भी देश ने सोचा नहीं था. लेकिन अब ऐसा हो गया है. रिब्लिकन पार्टी का इलेक्शन कैंपेन समय के साथ जोर पकड़ रहा है. इसके साथ ही क्रिप्टो करेंसी एक चुनावी मुद्दे के रूप में और ज्यादा मजबूती से उभर रहा है.

Donald Trump के लिए ट्रंप कार्ड है Crypto

खास बात तो ये है कि इसी महीने के आखिर में अमेरिकी राज्य टेनेसी की राजधानी नैशविले में बिटकॉइन कांफ्रेंस होने जा रहा है. इस कांफ्रेंस में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की स्पीच क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को मेनस्ट्रीम पॉलिटिकल टॉपिक के रूप और मजबूत और पुख्ता कर देगी. यही वजह है व्हाइट हाउस की सांसे लगातार ऊपर नीचे हो रही है. आखिर क्यों अमेरिकी चुनाव में क्रिप्टोकरेंसी एक बड़े मुद्दे के तौर पर उभरता जा रहा है? डोनाल्ड ट्रंप क्रिप्टोकरेंसी को एक चुनावी मुद्दा बनाने में क्यों जुटे हुए हैं? क्या क्रिप्टोकरेंसी को चुनावी बनाने से डोनाल्ड ट्रंप को फायदा हो सकता है? आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं…

क्रिप्टो बन रहा है चुनावी मुद्दा? 

वैसे अमेरिकी चुनाव में कई मुद्दे रेंग रहे हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी और वहां के लोगों के लिए काफी जरूरी है. ऐसे में क्रिप्टो की पॉलिटिकल हैसियत कुछ भी नहीं है. लेकिन इस बार ये चुनावी मुद्दा बन रहा है, उसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं. पहला कारण तो ये है कि अमेरिका जैसे देश की कुल आबादी का करीब 16 फीसदी हिस्सा क्रिप्टो होल्डर है. जी हां, ये आबादी किसी भी देश की राजनीतिक दिशा को तय करने के लिए काफी है. डोनाल्ड ट्रंप अब इसी वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुट गए हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिका का क्रिप्टो लवर भी धीरे-धीरे ही ट्रंप के इस चुनावी कैंपेन के साथ खड़ा होता हुआ दिखाई दे रहा है.

ट्रंप में बना रहे हैं क्रिप्टो को मुद्दा? 

डोनाल्ड ट्रंप यूं ही क्रिप्टोकरेंसी को मुद्दा बना रहे हैं. बीते कुछ बरस में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर मौजूदा सरकार का रुख रहा है, उससे किप्टोकरेंसी होल्डर खुश नहीं है. क्रिप्टोकरेंसी होल्डर को इस दौरान नुकसान भी काफी हुआ है. वहीं दूसरी ओर क्रिप्टो जहां फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के तरीकों को बदल रहा है. वहीं दूसरी ओर पॉलिटिकल डायनामिक्स को भी चेंज कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप को इस बार पॉलिटिकल डोनेशन के रूप में काफी क्रिप्टोकरेंसीज मिली हैं. वहीं दूसरी ओर खुद डोनाल्ड ट्रंप क्रिप्टोकरेंसी(Cryptocurrency) फ्रेंडली हैं. ऐसे में जिस तरह से इस इंडस्ट्री को हाशिए पर धकेलने की कोशिश हुई अब उसी इंडस्ट्री के Donald Trump खड़े दिखाई दे रहे हैं. जिसका उन्हें समर्थन भी काफी मिल रहा है.

16 फीसदी लोग क्रिप्टो के दिवाने 

अमेरिका के डेमोग्राफी में क्रिप्टो होल्डर्स को कैलकुलेट करेंगे तो आप भी दंग रह जाएंगे. फेड रिजर्व के आंकड़ों के अनुसार साल 2023 में देश की 7 फीसदी युवा आबादी के पास क्रिप्टोकरेंसी है या फिर उसका इस्तेमाल कर रही है. वहीं दूसरी ओर क्रिप्टो इंवेस्टमेंट फर्म पैराडाइम की रिपोर्ट के अनुसार 28 फीसदी रिपब्लिकन पॉलिटिकल चेहरों ने क्रिप्टो को खरीदा हुआ है. क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस के अनुसार अमेरिका में 5.30 करोड़ आबादी के पास क्रिप्टोकरेंसी है. जोकि कुल आबादी का 16 फीसदी है. मौजूदा समय में अमेरिकी कुल आबादी 34 करोड़ है. यह दुनिया का तीसरा ऐसा बड़ा देश है, जहां पर कुल आबादी का बड़ा हिस्सा किप्टोकरेंसी का दिवाना है. पहले नंबर पर 30.39 फीसदी के साथ यूएई है और उसके बाद 21 फीसदी के साथ वियतनाम का नाम है. अब आप अंदाजा लगा सकता है कि आखिर रिपब्लिकन कैंडीडेट डोनाल्ड ट्रंप किप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को चुनावी मुद्दा बनाने में क्यों जुटे हुए हैं.

क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में उछाल

आपको याद होगा जब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर जानलेवा हमला हुआ और वो बच गए, उसके बाद उनके इलेक्शन जीतने की संभावनाएं काफी बढ़ गई. जिसके बाद से बिटकॉइन साथ बाकी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. अगर मंगलवार की करें तो कॉइन डेस्क के आंकड़ों के अनुसार बिटकॉइन की कीमत में करीब 3 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है और दाम 65 हजार डॉलर के करीब पहुंच गए हैं. 12 जुलाई को ट्रंप को गोली लगने से पहले बिटकॉइन 58 हजार डॉलर पर था. शनिवार को घटना के बाद दाम 60 हजार डॉलर के पार चले गए. मंगलवार तक आते-आते इसमें 7 हजार डॉलर तक का इजाफा देखने को मिल चुका है.

 

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