संगोष्ठी का विषय था- “हिन्दी साहित्य में मालती जोशी (Malti Joshi) का योगदान”। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित मालती जोशी पर एक लघु वृत्तचित्र भी दिखाया गया। गौरतलब है कि प्रख्यात साहित्यकार मालती जोशी (Malti Joshi) का निधन 15 मई, 2024 को हुआ था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की अध्यक्ष एवं साहित्य अकादमी की उपाध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा ने की। श्रोताओं को हिन्दी अकादमी के उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध हास्य कवि श्री सुरेंद्र शर्मा का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ। वहीं लेखक एवं पत्रकार श्री अनंत विजय और लेखक एवं शिक्षाविद डॉ. पवन विजय विशिष्ट वक्ता थे। इस अवसर पर हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक, प्रसिद्ध कलाकार व कथाकार श्रीमती मालविका जोशी और हिन्दी अकादमी दिल्ली के सचिव श्री संजय गर्ग की भी गरिमामय उपस्थिति रही।
इस संगोष्ठी में हिन्दी साहित्य(Hindi Sahitya) में मालती जोशी के रचनात्मक योगदान और लेखन पर चर्चा की गई। मालती जोशी(Malti Joshi) की रचनाएं हिन्दी साहित्य में एक अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं और यह संगोष्ठी उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
प्रो. कुमुद शर्मा ने क्या कहा
प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि मालती जोशी(Malti Joshi) ने परिवार को अपनी कहानियों का केन्द्र बनाया, लेकिन उनकी जो परिवार केन्द्रित कहानियां हैं, उसमें प्रेम का बहुत उदात्त रूप देखने को मिलता है। उनकी कहानियों के चरित्र पाठकों को बांधे रखते हैं। मालती जी को मालूम था कि यथार्थ को लेना है, लेकिन उस यथार्थ को कैसे प्रस्तुत करना है, वह भी उन्हें बखूबी पता था। मालती जोशी जी का जो रचना संसार है, वह प्रासंगिक भी है और प्रामाणिक भी है।
श्री सुरेन्द्र शर्मा ने ये कहा
श्री सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि देखा जाए तो कोई कलाकार, कोई साहित्यकार मरता नहीं है। उसकी कला, उसका रचना उसे जीवित रखती है। वह तब मरता है, जब उसकी रचनाएं लोगों को याद नहीं रहतीं, उसका नाम याद नहीं रहता।
मालती जोशी(Malti Joshi) की बहू तथा कथाकार मालविका जोशी ने एक मां, एक सास और एक लेखिका के रूप में मालती जोशी के विराट व्यक्तित्व से श्रोताओं का साक्षात्कार कराया। उन्होंने कहा कि मालती जी उनके लिए एक सास से ज़्यादा मां थीं। अनंत विजय ने कहा कि मालती जी ने धारा के विरुद्ध लेखन किया। उन्होंने अपनी कहानियों में भारतीय मूल्यों को कभी नहीं छोड़ा। उनकी एक और विशेषता थी कि उनकी कहानियों में पात्र जो भाषा बोलता है, वह उसकी अपनी भाषा होती है। आमतौर पर कहानीकारों से चूक यह होती है कि संवाद शैली में वो अपनी भाषा आरोपित या प्रक्षेपित करता रहता है उन पात्रों पर, लेकिन मालती जोशी की कहानियां इस प्रवृत्ति से मुक्त हैं। डॉ. पवन विजय ने मालती जोशी(Malti Joshi) के लेखन का समाजशास्त्रीय दृष्टि से विवेचन किया। उन्होंने कहा, मैं मूल रूप से समाजशास्त्री हूं और जब मैं मालती जोशी की रचनाओं को पढ़ता हूं, तो उनकी रचनाओं में मुझे समाजशास्त्र के दर्शन होते हैं।
साधना शर्मा ने दिया स्वागत भाषण
कार्यक्रम का प्रारम्भ में, एस.पी.एम. कॉलेज की प्राचार्य प्रो. साधना शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का संचालन एस.पी.एम. कॉलेज की डॉ. शिवानी ने किया और अंत में कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. अनुराग सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस संगोष्ठी में हिन्दी साहित्य में रुचि रखने वाले सुधीजनों, विद्वतजनों एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
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