दशहरा 2026 : राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने किया रावण दहन, देशभर में उत्सव के बीच दिखा सियासी रंग

बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी का पर्व मंगलवार को देशभर में धूमधाम से मनाया गया। राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलग-अलग समारोहों में हिस्सा लेकर रावण दहन किया। वहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में पारंपरिक रावण दहन के साथ समकालीन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की झलक भी दिखाई दी। कहीं स्वच्छता का संदेश देने के लिए कॉकरोच का विशाल पुतला जलाया गया, तो कहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्रों वाले पुतलों के जरिए राजनीतिक विरोध दर्ज कराया गया।

इंद्रप्रस्थ रामलीला मैदान में विजयादशमी समारोह में रावण वध करते पीएम नरेद्र मोदी
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: October 20, 2026 11:30 pm

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारका में आयोजित श्रीरामलीला समारोह में शामिल हुईं। उनके साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने रावण के पुतले का दहन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ रामलीला मैदान में विजयादशमी समारोह में हिस्सा लिया और देशवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। लालकिला मैदान की लव कुश रामलीला में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी पहुंचे।

पीतमपुरा में 30 फुट के कॉकरोच का दहन

इस बार दशहरे के आयोजनों में दिल्ली के पीतमपुरा स्थित नेताजी सुभाष प्लेस मैदान में 30 फुट ऊंचे कॉकरोच के पुतले का दहन विशेष चर्चा में रहा। श्री केशव रामलीला समिति ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पारंपरिक पुतलों के साथ इसे भी शामिल किया।

समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल ने इसे गंदगी तथा अस्वच्छता के खिलाफ प्रतीकात्मक पहल बताते हुए स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली का संदेश देने की बात कही। हालांकि, इस आयोजन का समय कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों के बीच होने के कारण इसे राजनीतिक संदर्भ में भी देखा गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस घटनाक्रम पर व्यंग्य करते हुए इसे अपने संगठन के लिए मुफ्त प्रचार बताया।

 ज्ञानेश कुमार और मोदी के चित्रों वाले पुतलों से विरोध

दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के चेहरे वाले रावण के पुतले का दहन कर चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विरोध जताया। संगठन ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी रायसीना रोड स्थित अपने मुख्यालय पर दस सिरों वाला रावण तैयार किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ज्ञानेश कुमार सहित अन्य लोगों के चित्र लगाए गए। संगठन ने इसे कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन बताया। माकपा के नेताओं ने भी एसआईआर के विरोध में पुतला दहन किया और मताधिकार की रक्षा का मुद्दा उठाया।

इन प्रदर्शनों में लगाए गए आरोप संबंधित संगठनों के राजनीतिक दावे हैं। पुतला दहन अपने आप में चुनावी अनियमितताओं का प्रमाण नहीं है।

नकली दवाओं से नशे तक बने बुराई के प्रतीक

दिल्ली के पश्चिम विहार में इंद्रप्रस्थ रामलीला समिति ने ‘आज का रावण’ थीम के जरिए नकली दवाओं के कारोबार और दवाओं की कीमतों में कथित हेरफेर जैसे मुद्दों को उठाया। लखनऊ में रावण के पुतले के जरिए राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और वैचारिक मुद्दों पर संदेश देने की कोशिश की गई। पंजाब के लुधियाना में नशे की समस्या को प्रतीकात्मक रूप से दशहरा आयोजन से जोड़ा गया।

मध्य प्रदेश के इंदौर में सौरभ राजपूत हत्याकांड से जुड़े आरोपियों के चित्रों वाले पुतले को लेकर भी विवाद सामने आया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद चित्र हटाए गए और फिर पुतला दहन किया गया।

परंपरा के साथ समकालीन मुद्दों की बहस

इस वर्ष के दशहरा आयोजनों में एक ओर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मौजूदगी वाले पारंपरिक समारोहों ने पर्व के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित किया, तो दूसरी ओर विभिन्न संगठनों ने रावण दहन के मंच का इस्तेमाल सामाजिक समस्याओं और राजनीतिक विरोध को सामने रखने के लिए किया।

रावण दहन का मूल संदेश अहंकार, अन्याय और बुराई पर अच्छाई की जीत है। लेकिन इस बार अलग-अलग आयोजनों में यह सवाल भी उभरा कि समाज की वास्तविक बुराइयों—गंदगी, नशे, नकली दवाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले विवादों—का समाधान केवल प्रतीकात्मक विरोध से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई और जवाबदेही से ही संभव है। दशहरे का उत्सव समाप्त होने के बाद अब चुनौती यही है कि बुराई पर विजय का संदेश सामाजिक जीवन में भी दिखाई दे और उठाए गए मुद्दों पर संबंधित संस्थाएं तथा प्रशासन प्रभावी कदम उठाएं।

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