पटना जिले के नदी किनारे और दियारा क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा गंभीर है। बिंद टोली में बाढ़ का पानी घरों में पहुंचने के बाद करीब 1,500 प्रभावित लोगों के मरीन ड्राइव के पास टेंट-त्रिपाल में रहने की रिपोर्ट है। दीघा के नकटा दियारा तथा दानापुर और मनेर के दियारा क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर सामने आया है। जिला प्रशासन के अनुसार पटना जिले के नौ प्रखंडों में करीब 2.32 लाख आबादी प्रभावित है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के बावजूद पटना के मुख्य शहरी हिस्सों में पानी के प्रवेश को रोकने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है। पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल के 108 खुले हिस्सों को बंद करने, रिसाव वाले स्थानों को दुरुस्त करने तथा 13 स्लुइस गेट और ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सादिकपुर/सदाकत आश्रम और पाटलिपुत्र कॉलोनी के आसपास भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।
राज्य स्तर पर भी राहत और बचाव की तैयारी तेज है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक संवेदनशील इलाकों में 6 एनडीआरएफ और 27 एसडीआरएफ टीमों को तैनात किया गया है तथा करीब 693 सरकारी नावें राहत, बचाव और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए संचालित की जा रही हैं। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई भी चलायी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 4 सितंबर को बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया था। मुख्यमंत्री सचिवालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर, दियारा और निचले इलाकों की स्थिति तथा राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी, प्रभावित लोगों की पहचान कर तत्काल सहायता देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बक्सर से भागलपुर तक गंगा के तटबंधों की सतत निगरानी करने तथा कटाव या टूट की आशंका वाले स्थानों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने बाढ़ राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन एवं राहत सामग्री उपलब्ध कराने तथा कमांड सेंटर को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़कर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की लगातार निगरानी करने का निर्देश भी दिया।
पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा भी 4 सितंबर की मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में शामिल थे। आधिकारिक बैठक में 13 अन्य जिलों के जिलाधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े थे।
इस बीच राज्य में कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती नदी किनारे और दियारा इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित रखना, तटबंधों पर निगरानी बनाए रखना और बढ़ते जलस्तर को पटना के मुख्य शहरी क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकना है। फिलहाल प्रशासन की निगरानी और राहत-बचाव व्यवस्था लगातार सक्रिय है, लेकिन गंगा के रिकॉर्ड स्तर को देखते हुए पटना में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
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