विशिष्ट अतिथि प्रो. रविप्रकाश टेकचन्दानी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि तकनीकी विकास के एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही, भारतीय मूल्यों पर आधारित “इंडियन एआई टूल” के विकास की बात भी कही। हिन्दी पत्रकारिता के ख्यात नाम पत्रकार प्रो. गोविन्द सिंह ने हिन्दी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए स्वतंत्रता आन्दोलन में इसके योगदान को रेखांकित किया।
प्रो. वंदना पाण्डेय ने हिन्दी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करते हुए विभाजन काल की रिपोर्टिंग के अध्ययन पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आलोचनाओं के बावजूद, हिन्दी पत्रकारिता का महत्व बना हुआ है और इसके इतिहास की अनदेखी भविष्य के विकास को प्रभावित कर सकती है। शिक्षाविद् प्रो. राघवेन्द्र मिश्र ने बदलते परिवेश में हिन्दी पत्रकारिता की दिशा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निश्चित रूप से हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कई बदलाव हो रहे हैं, कुछ बदलाव तकनीकी के कारण, तो कुछ बदलाव बाजार के कारण, परन्तु यह आज भी आम आदमी की शरणस्थली है।
दूरदर्शन के न्यूज़ एंकर अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि समाज में नकारात्मक एवं सकारात्मक दोनों ही कंटेंट हैं, एक अच्छे पत्रकार की दृष्टि निर्धारित करती है कि लोग किस प्रकार के समाचार से जुड़ेंगे एवं महत्त्व देंगे। डॉ. तुमुल कक्कड़ ने शोध आधारित पत्रकारिता पर बल दिया। प्रो. सिद्धार्थ मिश्र ने पत्रकारों के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी के पहले दिन कुल पांच सत्रों में हिन्दी पत्रकारिता की विकास यात्रा, हिन्दी पत्रकारिता का राष्ट्र निर्माण में योगदान, हिन्दी समाचार पत्रों एवं संपादकों की भूमिका, एआई एवं हिन्दी पत्रकारिता इत्यादि विषय पर देश के विभिन्न हिस्सों से शोधार्थियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत किये।
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