पत्रकारिता का इतिहास सिर्फ अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य का खाका तैयार करने वाली ताकत है, इसलिए हमें ‘उदन्त मार्तण्ड’ की तरह हितैषी और ‘प्रताप’ की तरह लोकजागरण के लिए समर्पित होना होगा। विकसित भारत 2047 के परिप्रेक्ष्य में अपनी बात रखते हुए उपसभापति ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, स्वच्छ और स्वस्थ ऊर्जा को बढ़ावा देना और डिजिटल क्रांति में रचनात्मक योगदान देना आज की पत्रकारिता की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। उन्होंने चाणक्य नीति का हवाला देते हुए अर्थ की मजबूती को राष्ट्रनिर्माण का केंद्रीय तत्व बताया और कहा कि यदि हम समस्याओं का समाधान खोजने से कतराएंगे तो बेहतर भविष्य का रास्ता संकरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत आज डिजिटल, वैक्सीन, रेल, मेट्रो नेटवर्क, डीबीटी, रक्षा आदि अनेक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के क्षेत्र में देश नित नए प्रयोग कर रहा है और अब कर्मयोगियों को पद्म पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया जा रहा है, जो बदली हुई राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का संकेत है। संगोष्ठी का आयोजन रामलाल आनंद महाविद्यालय के हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से ‘भारत बोध और हिंदी पत्रकारिता : 200 वर्षों की यात्रा’ विषय पर 13–14 मार्च 2026 को किया गया। समापन सत्र में ‘हिंदी पत्रकारिता और विकसित भारत 2047’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में हरिवंश ने अपने विचार रखते हुए कहा कि विकसित भारत की संकल्पना सिर्फ आर्थिक विकास तक सीमित नहीं, बल्कि विचार, भाषा और पत्रकारिता की स्वायत्तता से भी जुड़ी हुई है।
समारोह की शुरुआत में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राकेश कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य अतिथि हरिवंश का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने संगोष्ठी में आए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि रामलाल आनंद महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय का एकमात्र महाविद्यालय है जिसने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठी का आयोजन किया है।संगोष्ठी के समापन सत्र में पत्रकारिता विभाग के शिक्षक डॉ. अटल तिवारी ने दो दिवसीय कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि कैसे विभिन्न सत्रों में हिंदी पत्रकारिता के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार के संयोजक प्रो. राकेश कुमार ने उपसभापति हरिवंश के सौम्य स्वभाव, जिम्मेदारी-बोध और संवादशीलता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान सवाल-जवाब सत्र में पत्रकारिता के विद्यार्थी आलोक यादव और आयुष ने उपसभापति से पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से उत्तर दिया। संगोष्ठी के पहले दिन शोध पत्र वाचन करने वाले विद्यार्थियों को समापन सत्र में हरिवंश के हाथों सम्मानित किया गया, जबकि पूरे कार्यक्रम का संचालन आस्था त्रिपाठी ने किया। समापन सत्र से पहले ‘भारत बोध और राष्ट्र चेतना की हिंदी पत्रकारिता’ विषयक सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय से आए वक्ता डॉ. किंशुक पाठक ने कहा कि समुद्र में जो दीप-स्तंभ जहाजों को दिशा दिखाता है, उसी तरह ‘उदन्त मार्तण्ड’ ने हिंदी पत्रकारिता की दिशा तय की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आए प्रो. धनंजय चोपड़ा ने पंडित युगल किशोर शुक्ल के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक कनपुरिया का बंगाल जाकर अखबार निकालना इस बात का प्रमाण है कि ब्रिटिश शासन द्वारा संस्कृति और भाषा पर किए गए हमलों के प्रतिरोध में हिंदी में अखबार निकालने का निर्णय लिया गया था और उसी सोच के तहत 30 मई 1826 को ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन शुरू हुआ।
प्रो. चोपड़ा ने अपने संबोधन में गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता, ‘स्वराज’ और ‘सरस्वती’ पत्रिका के योगदान को भी विस्तार से रेखांकित किया। सत्र की अध्यक्षता कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सम्बन्ध डीन प्रो. अनिल राय ने कहा कि कलकत्ता से पत्र इसलिए निकले क्योंकि उस समय वहीं पर छापाखाने की सुविधाएं उपलब्ध थीं और यहीं से भारतेंदु युग, स्वतंत्रता आंदोलन और उस दौर की पत्रकारिता की सशक्त धारा आकार लेती गई।
उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र से लेकर स्वतंत्रता संग्राम समय तक की पत्रकारिता की परंपरा को विस्तार से सामने रखते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने राष्ट्रीय चेतना जगाने में अविस्मरणीय भूमिका निभाई है। सत्र का संचालन अंशिका वर्मा और दिव्या ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेश गौतम ने किया। संगोष्ठी के संयोजन की जिम्मेदारी डॉ. देवेंद्रनाथ तिवारी और डॉ. विशाल शर्मा ने संभाली, जबकि डॉ. सीमा भारती, डॉ. निशा सिंह, डॉ. श्वेता आर्या और रेडियो तरंग की फरजीन सुल्तान सहित विभाग के अन्य सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। इस मौके पर हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ. रोशनलाल मीणा, डॉ. एनी रे, डॉ. गोपाल यादव, डॉ. श्यामजीत यादव समेत कई विभागों के शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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