हास्य-व्यंग्य (Stray Dogs) : आपके लिए अस्पताल में ड्यूटी पर मुस्तैद हैं कुत्ते

इलाहाबाद के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (Swaroop Rani Nehru Hospital) में आवारा कुत्तों (Dogs) से निपटने के लिए 40 भूतपूर्व सैनिक भर्ती किए गए हैं।

Written By : अनिल त्रिवेदी | Updated on: September 29, 2024 5:26 pm

दूसरे शब्दों में कहें तो आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के कारण रिटायर्ड फौजियों को अस्पताल में नौकरी मिल गई। शायद देश का यह पहला मामला होगा जब कुत्तों ने रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। रोजगार सृजन की दिशा में कुत्तों का यह बड़ा योगदान है। हम चाहते हैं कि कुत्ते इसी तरह प्रयासरत रहें और दूसरे अस्पतालों में भी ऐसे अवसर दिलाने में इसी तरह सहयोग दें।

कुत्तों की पसंदीदा जगह

सरकारी अस्पतालों (Government Hospitals) से कुत्तों का पुराना और गहरा नाता है। सरकारी अस्पताल बिना डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ (Nursing Staff) के तो अक्सर चलते रहते हैं लेकिन बगैर कुत्तों के दो दिन नहीं चल सकते। अस्पताल कुत्तों (Dogs) की पसंदीदा जगह है। इसीलिए अस्पतालों में मरीजों के साथ-साथ कुत्ते भी अवश्य मिल जाएंगे। गेट और सीढ़ियों पर बैठे हुए, बरामदों में चहलकदमी करते हुए, कचरे के डिब्बों को उलट-पलटकर मुआयना करते और कुर्सी-बेंचों पर पंखों के नीचे आराम फरमाते हुए कुत्ते। मौका मिलते ही वे खाली बेड पर पैर फैलाकर थकान मिटाने से भी नहीं चूकते।

पहले कुत्ते अस्पतालों में उत्पात कम करते थे, लेकिन बीते दिनों भेड़ियों की देखा-देखी उनमें भी कटखनापन बढ़ गया। अचानक कुत्तों का आचरण उग्र हुआ तो मरीजों-तीमारदारों के साथ-साथ स्टाफ को भी खतरनाक लगने लगा।

कुत्तों को ट्रेनिंग से बात बने

हो सकता है पहले अस्पताल प्रशासन ने Stray Dogs को प्यार से समझाने की कोशिश की हो, दो-तीन बार समझौता वार्ता भी हुई हो और कुत्ते कोई समझौता करने को तैयार न हुए हों। बात न बनते देख प्रशासन को सभी कुत्तों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला लेना पड़ा हो। दुखद है कि हालात ऐसे हो गए कि सीमा पर दुश्मनों से लड़ने वालों को अस्पताल में अपने ही देश के कुत्तों से भिड़ने के लिए मैदान में उतरना पड़ा है। मुझे लगता है कुत्तों के प्रति सख्ती के बजाय प्यार-दुलार से काम लिया जाना चाहिए। विदेशों में कुत्तों को ट्रेनिंग देकर उनसे मनचाहा काम लिया जा रहा है। यहां भी कुत्तों को स्पेशल ट्रेनिंगं देकर प्रशिक्षित किया जा सकता है।

गेट से लेकर बेड तक ड्यूटी

मैं कल्पना कर रहा हूं कि कुत्तों (Stray Dogs) को प्रशिक्षित करने के बाद अस्पताल में माहौल कुछ ऐसा होगा। मरीज और तीमारदार जब गेट पर पहुंचे तो हेलो-हाय करते हुए प्यारे से दो कुत्ते मिले। एक आगे चलते हुए मरीज को पर्ची बनने वाले काउंटर तक लेकर जा रहा है। पर्ची बनने के बाद दूसरा कुत्ता मरीज को डॉक्टर के चैंबर तक पहुंचा रहा है। अगर जांच की जरूरत हो तो कुत्ता ही मरीज को लैब तक का रास्ता दिखा रहा है। एडमिट किए जाने की स्थिति में मरीज को बेड तक पहुंचाने का जिम्मा भी कोई कुत्ता ही संभाल रहा है। मैं सोच रहा हूं कि प्रशिक्षण के बाद कुछ कुत्ते मुंह में झाड़ू-पोंछा दबाए साफ-सफाई में लगे हैं। कुछ दांतों से गंदी चादरें खींचकर अलग कर रहे हैं, कुछ अपने पंजों से धुली चादरें बिछाकर बेड दुरुस्त करने में लगे हैं। कुछ कुत्ते नाश्ता-खाने की ट्राली खींचकर मरीजों के पास ले जाने में व्यस्त हैं तो कुछ दवाइयों की ट्रे मुंह में दबाए नर्सों के पास खड़े हैं।

क्रांतिकारी हो सकता है प्रयोग

कुत्तों(Dogs) को प्रशिक्षित करके अस्पताल में ड्यूटी पर लगाने का प्रयोग क्रांतिकारी साबित हो सकता है। इससे अभी एकदम निठल्ले घूम रहे कुत्तों की बड़ी आबादी का सदुपयोग हो सकेगा और कम से कम मैनपावर में अस्पताल के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। कुत्तों से किसी तरह के खतरे का तो मुद्दा ही खत्म हो जाएगा। अस्पतालों में यह प्रयोग सफल हो तो इसे बाद में रेलवे और दूसरे सरकारी विभागों में भी लागू किया जा सकता है। अपने देश में कुत्तों की कमी नहीं है। हो सकता है इन प्रशिक्षित कुत्तों के बेहतर परफार्मेंस के बाद दूसरे देशों से भी इनकी डिमांड आए तो इन्हें अन्य देशों में भी भेजा जा सकता है। फिलहाल अस्पताल के कुत्तों पर फोकस किया जाए।

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