इस दौरान पटना जोन के आईजी जितेंद्र राणा घायल हो गए, जबकि जीआरपी, आरपीएफ और जिला पुलिस के कई जवानों को भी चोटें आईं। हालात बेकाबू होने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। रविवार को आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शनिवार रात से ही पटना पहुंचने लगे थे। पाटलिपुत्र स्टेशन पर हजारों युवाओं की भीड़ जमा हो गई।
ट्रेनों में सवार होने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की जल्दबाजी के बीच अव्यवस्था बढ़ती चली गई। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कुछ समूहों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।स्थिति तब और बिगड़ गई जब उग्र भीड़ रेलवे ट्रैक और प्लेटफॉर्म पर उतर आई।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए स्टेशन परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के प्रयास विफल होने पर भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए पथराव से मौके पर मौजूद पुलिस बल को संभलने का अवसर नहीं मिला और कई जवान घायल हो गए। आईजी जितेंद्र राणा भी पत्थर लगने से चोटिल हो गए।
हिंसा बढ़ने पर पुलिस ने पहले भीड़ को हटाने का प्रयास किया, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी तो बल प्रयोग करना पड़ा। लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद धीरे-धीरे भीड़ को स्टेशन परिसर से हटाया गया। घटना के दौरान कुछ समय के लिए रेलवे परिचालन भी प्रभावित रहा और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना ने भर्ती परीक्षाओं के दौरान भीड़ प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना ऐसे समय हुई है जब बिहार में 5,252 पदों के लिए सिपाही भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का एक साथ विभिन्न जिलों में आवागमन हो रहा है। यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि लाखों अभ्यर्थियों की आवाजाही को देखते हुए रेलवे और प्रशासन की तैयारियां पर्याप्त नहीं थीं। कई रिपोर्टों में भीड़ प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था की खामियों को इस घटना का प्रमुख कारण बताया गया है।
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