भारत की योग परंपरा निखिल विश्व को निरामय बना रही है : डॉ अनिल सुलभ

भारत की महान योग-परंपरा, रोग-मुक्त रहने की शिक्षा देकर, अब निखिल विश्व को निरामय बना रही है। आसान, प्राणायाम और ध्यान वे क्रियाएँ हैं, जो व्यक्ति को तन, मन और आत्मा से स्वस्थ और पावन बनाती हैं। इस विधि द्वारा ऐसे मनुष्यों का समाज बनाया जा सकता है, जो संपूर्ण विश्व को आनन्दकर और मंगलमय बना सकेगा।

Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: June 21, 2026 11:59 pm

योगासनों को सरल, सर्व-ग्राह्य और विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाने में योग -गुरु आचार्य रामदेव का श्रेष्ठतम योगदान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत की योग परंपरा को वैश्विक स्वरूप देने का श्रेय इसलिए जाता है कि उनके प्रयासों से आज ‘अंतर्राष्ट्रीय योग-दिवस’ मनाया जाता है।

यह बातें अंतर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के संयुक्त सचिव और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने, आदर्श योग केंद्र,पटना द्वारा कंकड़बाग स्थित शिवाजी पार्क में आयोजित योग-दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए कही। उन्होंने केंद्र द्वारा आयोजित योग-प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों और आचार्यों आचार्य श्याम नन्दन, अजय कुमार, श्वेता बौबी, आर्या, माला, उमा, राधा, शोभा बरनबाल, रीना सहाय, नीलम देवी, पुष्पा कुमारी, ऋषिकेश आदि योगाभ्यासियों को पुरस्कृत और सम्मानित किया। आरम्भ में योग-केंद्र के अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह, मुख्य-आचार्य शैलेंद्र कुमार तथा संरक्षक कुमार अनुपम ने अंग-वस्त्रम और भगवान कृष्ण का चित्र भेंट कर डा सुलभ को सम्मानित किया।

योग-दिवस के निर्धारित योग-क्रियाओं के पूर्व, केंद्र के नित्य-अभ्यासी साधक-साधिकाओं ने योग के कलात्मक आसनों को प्रस्तुत कर दर्शकों को योग के सौंदर्य-बोध से भी परिचित कराया।
भाजपा नेता सुनील सिन्हा, सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य सत्येंद्र सिंह, राणा प्रताप सिंह, नंद किशोर ठाकुर, अनिल बरणवाल, राकेश कुमार रौशन, बिंदेश्वर गुप्ता आदि सैकड़ों की संख्या में योग-अभ्यासी उपस्थित थे।

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