महात्मा सुशील ने परमात्मा से साक्षात्कार की साधना पद्धति दी : माँ विजया 

परमात्मा प्रत्येक मनुष्य के अंतर में ही प्रतिष्ठित हैं। मन की माया उसे परमात्मा से दूर किए रहती है। परमात्मा को पाने के लिए आंतरिक-साधना ही साधन है। नियमित साधना से मन की वही माया नष्ट होती है और परमात्मा का दर्शन होता है। इस्सयोग के रूप में महात्मा सुशील जी ने साधना की वही आंतरिक पद्धति दी है जिससे कर्मफल काटे जा सकते हैं और माया से मुक्त होकर मोक्ष पाया जा सकता है।

Written By : डेस्क | Updated on: April 24, 2026 8:48 pm

परमात्मा प्रत्येक मनुष्य के अंतर में ही प्रतिष्ठित हैं। मन की माया उसे परमात्मा से दूर किए रहती है। परमात्मा को पाने के लिए आंतरिक-साधना ही साधन है। नियमित साधना से मन की वही माया नष्ट होती है और परमात्मा का दर्शन होता है। इस्सयोग के रूप में महात्मा सुशील जी ने साधना की वही आंतरिक पद्धति दी है जिससे कर्मफल काटे जा सकते हैं और माया से मुक्त होकर मोक्ष पाया जा सकता है।

यह बातें शुक्रवार को, ‘अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज’ के तत्त्वावधान में, ‘इस्सयोग’ के प्रवर्त्तक और अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के संस्थापक ब्रह्मलीन सद्ग़ुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के 24वें महानिर्वाण महोत्सव के दूसरे दिन ‘गुरुधाम’ में हवन-यज्ञ के पश्चात अपने आशीर्वचन में संस्था की अध्यक्ष और ब्रह्मनिष्ठ सदगुरुमाता माँ विजया जी ने कही। माता जी ने कहा कि नियमित साधना, माली के जल की भाँति है, जो नियमित रूप से पौधें को सिंचित करता है और एक दिन पौधा बड़ा होकर फूल और फल देने लगता है। साधना के नियमित अभ्यास से’ऋतंभरा-प्रज्ञा’ जाग उठती है। वही मूल चेतना और ब्रह्म है।

संस्था के उपाध्यक्ष (मुख्यालय) बड़े भैया श्रीश्री संजय कुमार ने सदगुरुदेव के आदर्श जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि ज्ञान और अज्ञान में केवल ‘अ’ का अंतर है। ‘अ’ अर्थात अहंकार। यही अहंकार यदि हम त्याग दें तो साधना फलीभूत होने लगती है। सदगुरुदेव ने हमें यही सिखाया। हमारे अंतर की जागृत शक्ति ही हमें गहन ताप और कष्ट को सहने की क्षमता प्रदान करती है। साधना से हमें उस अवस्था की प्राप्ति होती है कि बड़ा से बड़ा कष्ट भी हमें क्लांत नहीं कर पाता। कठिन समय में भी हम आनन्द में रह सकते है।

छोटे भैया श्री संदीप ने कहा कि हवन की अग्नि से हमारे तन और मन के सभी विकार दूर हो जाते हैं। सदगुरु हमें बताते थे कि साधना और हवन की अग्नि हमारा शोधन करती है। उन्होंने कहा कि हम सभी को इस इस्सयोग-परिवार में आने का लाभ अवश्य मिलता है। सभी प्रकार के लाभ, आध्यात्मिक और भौतिक भी। यदि हमें अपने जीवन को अच्छा करना है और जीवन के महान लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति है, तो उसका मार्ग केवल एक ही है- सूक्ष्म आंतरिक साधना। बाह्य कर्मकांड हमें क्षणिक लाभ दे सकते हैं, किंतु मानव-लक्ष्य की प्राप्ति तक नहीं पहुँचा सकते। सदगुरुदेव ने ‘इस्सयोग’ के रूप में वह सूक्ष्म आंतरिक साधना पद्धति प्रदान की कि जिससे वह महान लक्ष्य पाया जा सकता है।

कल पूर्वाहन 10 बजे से आरंभ हुई 24 घंटे की अखण्ड-साधना और संकीर्तन का समापन आरती-गान के साथ प्रातः 10 बजे हुआ। हवन-यज्ञ के पश्चात माताजी के आशीर्वचन के पूर्व प्रतिभाशाली चार इस्सयोगियों, शिकागो की सुश्री शुभ्रा राज, लंदन के मास्टर वैदिक और मास्टर भूपाल तथा बेगूसराय के चंदन कुमार को बड़े भैया द्वारा ‘महात्मा सुशील कुमार माँ विजया प्रोत्साहन पुरस्कार’ प्रदान किए गए।

यह जानकारी देते हुए, संस्था के संयुक्त सचिव डा अनिल सुलभ ने बताया कि, हवन-यज्ञ में मुख्य यज्ञमान के रूप में पूज्य बड़े भैया अपनी पत्नी रेणु गुप्ता के साथ हवन-कर्म संपन्न किया। छोटे भैया संदीप गुप्ता अपनी पत्नी नीना दूबे गुप्ता के साथ, शिवम् झा, श्री प्रणव, सुश्री संजना, पूव सांसद रमा देवी, संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा, ईं उमेश कुमार, लक्ष्मी प्रसाद साहू, माया साहू, वंदना वर्मा, अनंत कुमार साहू, श्रीप्रकाश सिंह, सरोज गुटगुटिया, दीनानाथ शास्त्री, डा जेठानंद सोलंकी, डा द्राशनिका पटेल, सूर्य भूषण, कपिलेश्वर मण्डल, संजय कुमार, सुशील प्रजापति, नीतिन साहू, राकेश श्रीवास्तव, डा मनोज धमीजा, अंजलि प्रसाद, मीरा देवी, किरण प्रसाद, अवधेश प्रसाद,राजेश वर्णवाल, योगेन्द्र प्रसाद, अजीत पटनायक, डा सूर्य भूषण, डा मनोज राज, विजय रंजन, प्रशांत एस, संतोष कुमार, डा गिरिजा शंकर, अंजलि प्रसाद, अनिता प्रसाद, हरि पण्डा, राजीव चौधरी, प्रभात चंद्र झा, अरविंद कुमार, कपिलेश्वर मंडल, रविकान्त, अमित लालू, डा कैलाश सोलंकी समेत इंग्लैंड, अमेरिका, मौरिशस, नेपाल और भारत के विभिन्न राज्यों से आए बड़ी संख्या में इस्सयोगियों ने आहूति अर्पित की। संस्था की कार्यसमिति की बैठक एवं महाप्रसाद के साथ दो दिवसीय यह दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव संपन्न हुआ।

ये भी पढ़ें :-आह्वान साधना के साथ आरंभ हुआ महात्मा सुशील का दो दिवसीय महानिर्वाण महोत्सव

2 thoughts on “महात्मा सुशील ने परमात्मा से साक्षात्कार की साधना पद्धति दी : माँ विजया 

  1. Backbiome is an advanced daily wellness supplement formulated to help support spinal comfort, reduce feelings of built-up tension, and promote freer, smoother movement throughout backbiome everyday life.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *