नेपाल की 275 सदस्यीय संसद House of Representatives of Nepal के लिए हुए चुनाव में अभी मतगणना जारी है। नेपाल चुनाव के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 50 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इनमें से लगभग 39 सीटें RSP के खाते में गई हैं, जबकि बाकी सीटों पर अन्य दल जीते हैं। कई सीटों पर अभी गिनती चल रही है और रुझानों में भी RSP करीब 100 से ज्यादा सीटों पर आगे बताई जा रही है।
नेपाल की संसद में कुल 275 सीटें हैं, जिनमें 165 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं और 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से भरी जाती हैं। सरकार बनाने के लिए 138 सीटों का आंकड़ा जरूरी होता है। मौजूदा रुझान बरकरार रहते हैं और RSP बहुमत के करीब पहुंचती है या गठबंधन बना लेती है तो Balendra Shah के नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
इस चुनाव में पारंपरिक दलों को बड़ा झटका लगा है। Nepali Congress और Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) जैसे पुराने दल शुरुआती नतीजों में काफी पीछे दिख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया इन नतीजों को नेपाल की राजनीति में “नई पीढ़ी के उभार” के रूप में देख रहा है। माना जा रहा है कि बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से नाराज युवाओं ने इस बार नए विकल्प को मौका दिया है।
भारत के लिए क्यों अहम
नेपाल में बनने वाली नई सरकार पर भारत की खास नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच खुली सीमा, गहरे व्यापारिक रिश्ते और सांस्कृतिक नजदीकी है। इसलिए काठमांडू की राजनीतिक दिशा का असर सीधे भारत पर भी पड़ता है।
विश्लेषकों का मानना है कि Balendra Shah की अगुवाई में बनने वाली सरकार पारंपरिक दलों की तुलना में कुछ नए प्रयोग कर सकती है। हालांकि व्यापार, ऊर्जा परियोजनाओं और लोगों के आपसी आवागमन जैसे मुद्दों पर भारत के साथ सहयोग जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल मतगणना जारी है और दूरदराज के कई इलाकों के परिणाम आना बाकी हैं। लेकिन शुरुआती नतीजों ने इतना साफ कर दिया है कि नेपाल की जनता इस बार पारंपरिक राजनीति से हटकर नए नेतृत्व को मौका देने के मूड में दिख रही है। अगर यही रुझान अंतिम परिणामों में भी कायम रहता है तो नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जाएगी।
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