फकीर मोहन स्वायत्त कॉलेज की यह 20 वर्षीय छात्रा बीएड इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम के दूसरे वर्ष में पढ़ाई कर रही थी। घटना के तुरंत बाद छात्रा को बालासोर जिला अस्पताल ले जाया गया था, जहां से गंभीर स्थिति के कारण उसे एम्स भुवनेश्वर स्थानांतरित कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्रा ने कॉलेज के शिक्षा विभागाध्यक्ष समीर कुमार साहू पर लंबे समय से यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। उसने कॉलेज प्रशासन को इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन आरोप है कि किसी भी स्तर पर गंभीर कार्रवाई नहीं की गई।
इस घटना के बाद पुलिस ने विभागाध्यक्ष समीर कुमार साहू और कॉलेज प्राचार्य दिलीप घोष को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने प्राचार्य को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एम्स भुवनेश्वर में दीक्षांत समारोह के दौरान पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छात्रा की स्थिति के बारे में जानकारी लेने के लिए प्लास्टिक सर्जरी विभाग का दौरा किया था।
छात्रा की मौत के बाद राज्य में विरोध तेज हो गया है। भुवनेश्वर और बालासोर में विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की निंदा की और न्यायिक जांच की मांग की। बीजेडी और कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी कहा कि छात्रा को हर स्तर पर न्याय से वंचित किया गया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। ओडिशा पुलिस की महिला और बाल अपराध शाखा इस घटना की स्वतंत्र जांच कर रही है।
परिजनों का कहना है कि छात्रा ने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन उसे कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद उसने यह कदम उठाया। यह घटना राज्य में महिला सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशील मामलों में समय पर कार्रवाई की गंभीरता को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।
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