नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा का विकल्प और पूरक बताया गया है, जिससे यात्रियों का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के हिस्सों को सीधी अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मिलेगी।
उद्घाटन से पहले तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सड़कों का चौड़ीकरण, होर्डिंग, टेंट सिटी, वीआईपी मूवमेंट और सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर प्लान लागू किया गया है। प्रशासन ड्रोन निगरानी और विशेष ट्रैफिक डायवर्जन के जरिए लाखों लोगों की भीड़ संभालने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक समारोह में बड़ी जनसभा भी होगी, जिसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
तकनीकी दृष्टि से एयरपोर्ट को हाई-टेक सुविधाओं से लैस बताया गया है। CAT-3 प्रणाली के कारण घने कोहरे में भी उड़ान संचालन संभव होगा। 3900 मीटर लंबे रनवे और अत्याधुनिक टर्मिनल के साथ इसे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विकसित किया गया है।
हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स साफ करती हैं कि उद्घाटन के तुरंत बाद उड़ानें शुरू नहीं होंगी। संचालन चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा, जबकि पहले चरण में करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता विकसित की जा रही है।
आर्थिक दृष्टि से यह परियोजना ‘गेम चेंजर’ मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नोएडा-ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे और आसपास के इलाकों में निवेश, रोजगार और रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी। राज्य सरकार इसे उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाने वाले बड़े कदम के रूप में पेश कर रही है।
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