सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने एनएमसीएम की प्रदर्शनी का अवलोकन किया

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) द्वारा आयोजित प्रदर्शनी ‘लिविंग हेरिटेज इन मेटल, बैम्बू एंड क्ले : ट्रेडिशनल यूटेंसिल्स ऑफ नॉर्थईस्ट इंडिया’ (धातु, बांस और मिट्टी की जीवंत विरासत : पूर्वोत्तर भारत के पारम्परिक बर्तन’) का विशेष रूप से अवलोकन किया।

बाएं से दाएं - डॉ. सच्चिदानंद जोशी और मयंक शेखर एनएमसीएम के दो प्रकाशन चंचल कुमार को भेंट करते हुए
Written By : डेस्क | Updated on: July 3, 2026 12:33 am

यह प्रदर्शनी मुख्य रूप से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ के रूप में देखने की परिकल्पना से प्रेरित है, जो इस क्षेत्र की अपार सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक वैभव, आध्यात्मिक विरासत और विकास की संभावनाओं को रेखांकित करती है। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने उनका स्वागत किया और कुमार को प्रदर्शनी का अवलोकन कराया। एनएमसीएम के मिशन निदेशक डॉ. मयंक शेखर तथा एनएमसीएम की शोध टीम भी इस अवसर पर उपस्थित रही।

प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान कुमार ने मणिपुर की लॉन्गपी पॉटरी, मेघालय की लार्नाई पॉटरी, असम की बेल-मेटल शिल्पकला तथा पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों के पारम्परिक काष्ठ शिल्प और टोकरीसाजी (बास्केटरी) को प्रदर्शित करने वाली सुव्यवस्थित प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने सहभागी शिल्पकारों से संवाद भी किया, उनकी पारम्परिक शिल्पकलाओं के जीवंत प्रदर्शन देखे और भारत तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उनके उत्कृष्ट शिल्प कौशल और सतत प्रयासों की प्रशंसा की। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के पूर्व सचिव के रूप में श्री कुमार ने इस प्रदर्शनी को क्षेत्र की पारम्परिक शिल्पकलाओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने विभिन्न कलाकृतियों के सांस्कृतिक महत्त्व पर शिल्पकारों के साथ विस्तार से चर्चा की और इन्हें भारत की विविधता का एक महत्त्वपूर्ण अंग बताया।

राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 23 जून को आईजीएनसीए में प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं पद्मश्री सम्मान (2026) से सम्मानित टेची गुबिन तथा उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव बंदना प्रेयशी की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया था।

यह प्रदर्शनी पारम्परिक बर्तनों की परम्परा के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के सशक्त सामाजिक-पर्यावरणीय सम्बंधों और समृद्ध सामुदायिक इतिहास को विशिष्ट रूप से प्रस्तुत करती है। श्री चंचल कुमार ने एनएमसीएम को इस प्रकार की पहलों को निरंतर जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

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