बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान समेत 49 सदस्यीय मंत्रिपरिषद को शपथ दिलाई। इसमें 25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्री शामिल हैं। सरकार ने दो अल्पसंख्यक नेताओं — निताई रॉय चौधरी और दीपेन देवान — को भी मंत्री बनाकर समावेश का संकेत देने की कोशिश की है।
भारत की पहल और उम्मीद
शपथ समारोह में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए ओम बिरला का ढाका पहुँचना खास माना जा रहा है। हाल के महीनों में चुनाव और राजनीतिक बदलावों के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल कुछ ठंडा पड़ा था। ऐसे में भारत की उच्चस्तरीय मौजूदगी को नई सरकार से संवाद बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की प्राथमिकता सीमा सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दों पर पहले जैसी रफ्तार बनाए रखने की रही है। जानकार मानते हैं कि नई दिल्ली यह संदेश देना चाहती है कि सरकार बदलने से सहयोग का ढांचा नहीं बदलेगा।
बीएनपी का रुख और क्षेत्रीय समीकरण
हालाँकि, बीएनपी के पुराने रुख को देखते हुए भारत में कुछ सावधानी भी है। पार्टी को पहले पाकिस्तान और चीन के करीब माना जाता रहा है। इस वजह से नई सरकार की विदेश नीति पर नजर रखी जा रही है कि वह इन रिश्तों को किस दिशा में ले जाती है।
दूसरी तरफ, चुनाव के बाद अमेरिका के साथ रिश्ते बेहतर करने के संकेत भी सामने आए हैं। इसे नई सरकार की ऐसी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें वह कई देशों के साथ संतुलन बनाकर अपने विकल्प खुले रखना चाहती है।
‘हसीना फैक्टर’ की पेचीदगी
भारत-बांग्लादेश संबंधों की चर्चा में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का मुद्दा भी अहम बना हुआ है। उनके भारत से करीबी रिश्तों और मौजूदा राजनीतिक हालात ने इस मसले को संवेदनशील बना दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार के सामने चुनौती होगी कि घरेलू राजनीति और भारत के साथ व्यवहारिक रिश्तों के बीच संतुलन कैसे बैठाया जाए।
आगे क्या संकेत
नई सरकार के शुरुआती कदमों से लगता है कि ढाका अलग-अलग वैश्विक ताकतों के साथ रिश्ते साधते हुए आगे बढ़ना चाहता है। भारत की ओर से सकारात्मक संकेत और कूटनीतिक मौजूदगी उम्मीद जरूर जगाती है, लेकिन बीएनपी की पारंपरिक विदेश नीति और ‘हसीना फैक्टर’ जैसे मुद्दे आने वाले समय में रिश्तों की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल साफ है कि दोनों देशों ने बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए हैं। लेकिन असली तस्वीर आने वाले महीनों में लिए जाने वाले फैसलों और कूटनीतिक कदमों से ही सामने आएगी।
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