सीजेपी के दो गए तिहाड़ जेल, दिपके का नए प्रदर्शन का ऐलान
सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन के अगले चरण को लेकर दिपके की घोषणा ने दिल्ली के राजनीतिक घटनाक्रम को नई दिशा दी है। उन्होंने 16 अक्टूबर को शाम पांच बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर जुटने की अपील की है। ‘लहरा दो तिरंगा’ के नारे के साथ घोषित इस कार्यक्रम के जरिए संगठन ने संकेत दिया है कि जंतर-मंतर पर कार्रवाई के बावजूद वह अपना विरोध जारी रखना चाहता है। सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किए जाने के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया है। CJP के तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा किया गया।
पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किए जाने के बावजूद नेताओं ने वहां प्रवेश किया। पुलिस ने पूर्व में शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बंधपत्र के कथित उल्लंघन और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को भी कार्रवाई का आधार बताया। मजिस्ट्रेट के आदेश में भी पूर्व के बंधपत्र और कथित उल्लंघन का उल्लेख है। मामले में अगली कार्रवाई 19 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
दूसरी ओर, दिपके ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके नेताओं का दोष तिरंगा फहराना था। उन्होंने सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस के आरोप और CJP का पक्ष दोनों अलग-अलग दावे हैं; न्यायिक हिरासत को किसी आरोप में दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।
जंतर-मंतर के बाद अब कनॉट प्लेस पर नजर
CJP का 16 अक्टूबर का कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आंदोलन के लिए एक नए स्थान की घोषणा है। अब तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और वहां प्रवेश को लेकर पुलिस के साथ टकराव घटनाक्रम के केंद्र में रहा है। कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा प्रदर्शन का आह्वान करके दिपके ने आंदोलन को जारी रखने का संदेश दिया है।
हालांकि, कार्यक्रम के लिए दिल्ली पुलिस की अनुमति की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में इसे घोषित प्रदर्शन के रूप में ही देखा जाना चाहिए। शुक्रवार को पुलिस की भूमिका, प्रदर्शन में जुटने वाले लोगों की संख्या और कार्यक्रम के दौरान उठने वाले मुद्दों पर नजर रहेगी।
CJP का मुख्य विरोध SIR प्रक्रिया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। संगठन जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने के मुद्दे को भी उठा रहा है। दिपके ने संगठन को स्वतंत्र दबाव समूह बताया है और कहा है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध के मुद्दे पर INDIA ब्लॉक के साथ उसकी समानता है। हालांकि, इससे दोनों के बीच औपचारिक गठबंधन की पुष्टि नहीं होती।
राहुल गांधी की बैठक के बाद INDIA ब्लॉक की रणनीति में बदलाव
CJP के आंदोलन के बीच कांग्रेस और INDIA ब्लॉक ने भी अपने अगले कदमों पर विचार किया है। राहुल गांधी ने 13 अक्टूबर को अपने आवास पर विपक्षी नेताओं के साथ बैठक की थी। इससे पहले गठबंधन के नेता दिल्ली में लगातार मार्च निकाल चुके थे और SIR तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर अपनी आपत्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे थे।
बैठक के बाद त्योहारों के कारण नियमित प्रदर्शनों और मार्च की आवृत्ति घटाने का फैसला किया गया। नवरात्र, दुर्गापूजा और आगे आने वाले त्योहारों के दौरान लगातार दिल्ली में प्रदर्शन आयोजित करने के बजाय अब बीच-बीच में कार्यक्रम करने की रणनीति पर विचार है। विपक्षी नेताओं के बीच यह भी चर्चा रही कि कुछ गतिविधियां संबंधित दल अपने राज्यों में आयोजित कर सकते हैं, हालांकि दिल्ली को आंदोलन का प्रमुख केंद्र बनाए रखने की इच्छा भी सामने आई है।
राहुल गांधी ने संकेत दिया है कि SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के मुद्दे पर राजनीतिक विरोध समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि विपक्ष की लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन आगे की रणनीति का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए नियमित मार्च में कमी को आंदोलन समाप्त होने के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
अदालत की राह और सड़क की राजनीति साथ-साथ
विपक्ष की रणनीति में अब न्यायिक और राजनीतिक, दोनों मोर्चे महत्वपूर्ण हैं। SIR से जुड़े आरोपों और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। दूसरी तरफ, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक विरोध जारी रखने की घोषणा की गई है।
कांग्रेस और INDIA ब्लॉक का त्योहारों के दौरान प्रदर्शन सीमित करने का फैसला जहां आंदोलन की समय-सारिणी में बदलाव है, वहीं CJP का 16 अक्टूबर को नया कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि संगठन अपने स्तर पर विरोध जारी रखने की तैयारी कर रहा है। दोनों की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति अलग है, लेकिन SIR तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़े सवाल दोनों के सार्वजनिक बयानों में प्रमुखता से मौजूद हैं।
अब निगाहें शुक्रवार को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित कार्यक्रम पर रहेंगी। क्या दिपके के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे, क्या पुलिस अनुमति देगी और क्या अन्य विपक्षी संगठन इसमें भाग लेंगे—इन सवालों के जवाब से आंदोलन के अगले चरण की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी। वहीं, INDIA ब्लॉक की ओर से त्योहारों के बाद संयुक्त मार्च या किसी नए कार्यक्रम की घोषणा भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, दिल्ली में विरोध की रणनीति बदली है, लेकिन SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर राजनीतिक टकराव समाप्त होने के संकेत नहीं हैं।
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