मतदान से पहले चुनाव आयोग और प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। नॉर्थ बंगाल में भूटान सीमा को शाम 6 बजे के बाद बंद कर दिया गया है, ताकि बाहरी आवाजाही रोकी जा सके। इसके साथ ही कई जिलों में 96 घंटे की शराबबंदी लागू कर दी गई है, जबकि आधिकारिक तौर पर ड्राई डे की अवधि 48 घंटे बताई जा रही है।
राज्य के संवेदनशील इलाकों—कूचबिहार, अलीपुरद्वार, मालदा और मुर्शिदाबाद—में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। गांव-गांव में फ्लैग मार्च और चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, होटल, लॉज और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तक की सघन निगरानी की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर इस चुनाव को “सिक्योरिटी ऑपरेशन” की संज्ञा दी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, पहली बार बड़े पैमाने पर AI आधारित निगरानी और 100% वेबकास्टिंग लागू की गई है। चुनाव आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर री-पोल कराया जाएगा। अब तक सैकड़ों संदिग्ध तत्वों पर कार्रवाई और बड़ी मात्रा में नकदी व शराब जब्त की जा चुकी है।
चुनाव आयोग ने कई सीटों को “खर्च-संवेदनशील” श्रेणी में रखा है और वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही बूथ स्तर तक सुरक्षा का माइक्रो-मैनेजमेंट किया गया है, ताकि किसी भी तरह की हिंसा या गड़बड़ी को रोका जा सके।
स्थानीय प्रशासन का फोकस खासतौर पर सीमा सुरक्षा और हिंसा संभावित इलाकों पर है, जबकि चुनावी विशेषज्ञ इसे तकनीक और सख्ती के जरिए निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की बड़ी कवायद के रूप में देख रहा है। कुल मिलाकर, बंगाल का यह चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि सुरक्षा, रणनीति और साख की परीक्षा बन चुका है—जिसकी पहली कसौटी 23 अप्रैल को होने वाला मतदान होगा।
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