इस ManVandana Rath Yatra के माध्यम से लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा महिला सशक्तिकरण, स्वशासन, भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरूत्थान हेतु प्रयासों को जनसामान्य तक पहुंचाया जाएगा। यह यात्रा 13 नवंबर को मध्य प्रदेश के महेश्वर से शुरू होकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, रीवा, प्रयागराज, अयोध्या होते हुए 21 नवंबर को 13 सौ किलोमीटर की दूरी तय कर बाबा गोरखनाथ की नगरी गोरखपुर पहुंचेगी, जहां परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन होने जा रहा है।
विद्यार्थी परिषद का 70 वां राष्ट्रीय अधिवेशन 22 नवंबर से
अभाविप की ‘मानवंदना यात्रा'(ManVandana Rath Yatra)के रथ को अहिल्याबाई होलकर की राजधानी महेश्वर का स्वरूप दिया गया है, जिसमें लोकमाता अहिल्याबाई होलकर(Ahilyabai Holkar) की मूर्ति स्थापित की गई है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थलों पर संगोष्ठी, संवाद, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि आयोजित किए जाएंगे और पत्रक के माध्यम से अहिल्याबाई होलकर के जीवन से लोगों को अवगत कराया जाएगा। यह यात्रा 21 नवंबर को गोरखपुर पहुंचेगी, गोरखपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 70 वां राष्ट्रीय अधिवेशन 22-24 नवंबर आयोजित हो रहा है।
राधिका सिकरवार हैं रथयात्रा की संयोजक
‘मानवंदना रथ यात्रा'(ManVandana Rath Yatra) की संयोजक तथा अभाविप की मालवा प्रांत मंत्री राधिका सिकरवार ने कहा कि पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर का जीवन आदर्श है। उन्होंने शासन व्यवस्था को कुशलता से संभालने के साथ देश के विभिन्न स्थानों पर ऐतिहासिक मंदिरों के पुनर्निर्माण, नए मंदिरों के निर्माण, सार्वजनिक उपयोग के भवनों के निर्माण आदि द्वारा देश की समृद्ध विरासत में अपना योगदान दिया। उनके जीवन से आज की युवा पीढ़ी परिचित हो सके इसलिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ‘मानवंदना यात्रा’ का आयोजन हो रहा है।
महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल का बयान
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर जी का भारतीय समाज में प्रमुख तथा महत्वपूर्ण स्थान है। उनकी जन्म त्रिशताब्दी वर्ष में आयोजित हो रही अभाविप की मानवंदना रथ यात्रा से जनसामान्य को अहिल्याबाई होलकर के विशाल तथा प्रेरणादायक व्यक्तित्व से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इस यात्रा में पड़ने वाले स्थानों पर विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अहिल्याबाई ने कराये हिन्दू मंदिरों के जीर्णोद्धार
जानकारी के लिए बताते चलें कि अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को हुआ था जबकि निधन 13 अगस्त 1795 को हुआ था। वे मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध महारानी तथा इतिहास-प्रसिद्ध सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खण्डेराव की धर्मपत्नी थीं। वह परिहार गोत्र की थी । अहिल्याबाई के खाते में भारत और नेपाल के अनेक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिरों के जीर्णोद्धार करने और उसे भव्य स्वरुप प्रदान करने का रिकॉर्ड है, जिसमें काशी विश्वनाथ मंदिर, गया का विष्णुपद मंदिर, नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर, जनकपुर का माता सीता धाम और काशी के पंचगंगा घाट स्थित श्रीमठ का हजारा दीपस्तंभ प्रमुख है।
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