क्या फिर से भारत के लिए मुसीबत बनेगा कच्चा तेल, 85 दिन हुआ बड़ा खेल?

दुनिया में राजनीतिक गहमा-गहमी और Russia Ukraine war की वजह से उपजे माहौल की वजह से आशंका है कि भारत की जनता को फिर पेट्रोलियम पदार्थों के लिए जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। गत तीन माह से भी कम समय में (petrol price )13 फीसदी से भी अधिक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

Written By : वेनिका वशिष्ठ | Updated on: May 2, 2024 8:25 pm

गाजा में भले ही सीजफायर की खबरें सुनने को मिल रही हो. हूती विद्रोहियों को शांत करने और उन्हें लाल सागर में तैरते तेल टैंकर्स को निशाना नहीं बनाने को समझाया जा रहा, ताकि तेल की सप्लाई पर असर ना पड़े और कीमतों में इजाफा ना हो. उसके बाद भी कच्चे तेल की कीमतों पर उतना असर देखने को नहीं मिल रहा है, जितना मिलना चाहिए. बीते 85 दिनों में कच्चे तेल की कीमत में 13 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिल चुका है. इसका प्रमुख कारण यूरोप में बढ़ती जियो पॉलिटिकल टेंशन. रूस और यूक्रेन वॉर ने फिर से कच्चे तेल की कीमतों में आग लगाने का काम किया है. यूक्रेनी मिसाइलों का रूसी रिफाइनरीज को निशाना बनाने से सप्लाई में गिरावट आई है. दूसरी ओर अमेरिकी और चीनी इकोनॉमिक आंकड़ों के बेहतर आने से डिमांड में बढ़ोतरी देखी गई है. जिसका असर कीमतों में देखने को मिल रहा है.

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इसका असर भारत में देखने को मिलेगा. इसका प्रमुख कारण ये है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है. भारत में अपनी जरुरत का 85 फीसदी से ज्यादा तेल इंपोर्ट करता है. देश के इंपोर्ट​ बिल में ऑयल की हिस्‍सेदारी सबसे ज्‍यादा है. जब—जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होता है. भारत में महंगाई भी उसी हिसाब से बढ़ती है. रूस पर लगे प्रतिबंधों का फायदा देश को काफी महीनों तक मिला. लेकिन अब रूसी तेल की कीमतें भी आसमान पर है. दूसरी ओर रूस भी अब तेल को डिस्काउंट में देने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा देखने को मिलेगा? आइए आपको भी बताते हैं…

कितनी हो गई ​कच्चे तेल की कीमतें?

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है. आंकड़ों के अनुसार खाड़ी देशों का तेल यानी ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में 0.51 फीसदी के इजाफे के साथ 85.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. खास बात तो ये है कि बीते एक महीने में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 5 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. दूसरी ओर अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत में भी इजाफा देखने को मिल रहा है. सोमवार को अमेरिकी कच्चा तेल यानी डब्ल्यूटीआई के दाम 0.58 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 81.10 डॉलर प्रति बैरल पर है. बीते एक महीने में अमेरिकी तेल की कीमत में 6 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है.

85 दिन में 13 फीसदी की ​बढ़ोतरी

85 दिन यानी मौजूदा साल में कच्चे तेल के दाम में कच्चे तेल की कीमत में 13 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है. पहले बात अमेरिकी तेल की कीमत की बात करते हैं. साल की शुरूआत में डब्ल्यूटीआई के दाम 70 से 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब थे. मौजूदा समय में कीमतें 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इसका मतलब है अमेरिकी तेल की कीमतों में 13.10 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है. दूसरी ओर खाड़ी देशों के तेल की कीमत में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है. साल की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 75-76 डॉलर प्रति बैरल के बीच थी. जोकि 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब है.

क्या और होगा इजाफा?

जानकारों की मानें तो कच्चे तेल की कीमत में और इजाफा देखने को मिल सकता है. फिर चाहे गाजा पर सीजफायर पूरी तरह से ही क्यों ना हो जाए. उसका प्रमुख कारण यूरोपीय वॉर अभी जारी है. रूस और यूक्रेन एक दूसरे की फ्यूल प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जिसकी वजह से सप्लाई और प्रोडक्शन में असर देखने को मिल रहा है. दूसरी ओर ओपेक प्लस देशों की ओर प्रोडक्शन कट की अवधि को बढ़ाया हुआ है, जोकि जून तक जारी रहेगा. मुमकिन है यह प्रोडक्शन कट कैलेंडर ईयर के एंड तक जारी रहे. जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है. वहीं अमेरिकी रिग्स में कमी के साथ इकोनॉमिक आंकड़ों के बेहतर आने से कच्चे तेल की डिमांड में बढ़ोतरी भी प्रमुख कारण है. दूसरी ओर ओर चीन की ओर से बढ़ती डिमांड भी कच्चे तेल की कीमत में इजाफा कर सकती है. ऐसे में कैलेंडर ईयर के मिड तक कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल को क्रॉस कर सकती है.

क्या भारत में होगा इजाफा?

ये सवाल इसलिए बड़ा हो चला है कि क्यों मार्च के मिड में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमत में 2 रुपए की कटौती कर मामूली राहत देने की कोशिश की है. ये राहत भी चुनावी मानी जा रही है. जो कि जून के पहले हफ्ते तक मानी जा रही है. जून के पहले सप्ताह में चुनाव के नतीजे सामने होंगे. उसके बाद कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा कर सकती हैं. हाल ही में रिपोर्ट आई है कि 2 रुपए की कटौती के बाद देश में सरकारी ऑयल कंपनियों को मुनाफे में 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. ऐसे में मुमकिन है कि पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा करें.

देश के प्रमुख शहरों में फ्यूल के दाम :-
नई दिल्ली: पेट्रोल रेट: 94.72 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 87.62 रुपए प्रति लीटर
कोलकाता: पेट्रोल रेट: 103.94 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 90.76 रुपए प्रति लीटर
मुंबई: पेट्रोल रेट: 104.21 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 92.15 रुपए प्रति लीटर
चेन्नई: पेट्रोल रेट: 100.75 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 92.34 रुपए प्रति लीटर
बेंगलुरु: पेट्रोल रेट: 99.84 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 85.83 रुपए प्रति लीटर
चंडीगढ़: पेट्रोल रेट: 94.24 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 82.40 रुपए प्रति लीटर
गुरुग्राम: पेट्रोल रेट: 95.19 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 88.05 रुपए प्रति लीटर
लखनऊ: पेट्रोल रेट: 94.65 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 87.76 रुपए प्रति लीटर
नोएडा: पेट्रोल रेट: 94.83 रुपए प्रति लीटर, डीजल रेट: 87.96 रुपए प्रति लीटर

One thought on “क्या फिर से भारत के लिए मुसीबत बनेगा कच्चा तेल, 85 दिन हुआ बड़ा खेल?

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