पश्चिम बंगाल में प्रचार के अंतिम दिन सियासी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और चुनावी जंग अपने चरम पर पहुंच गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नदिया के कृष्णानगर, हावड़ा और औद्योगिक बेल्ट में लगातार रैलियां कर तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोप लगाए। उन्होंने मतदाताओं से “डबल इंजन सरकार” के नाम पर समर्थन मांगा और विकास, निवेश तथा रोजगार को मुख्य मुद्दा बनाया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हुगली, बर्धमान और नदिया जिलों में रोड शो और जनसभाओं के जरिए संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले चरण में हुई भारी वोटिंग को “परिवर्तन का संकेत” बताते हुए दावा किया कि भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा।
वहीं मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता, दक्षिण 24 परगना, बीरभूम और अन्य क्षेत्रों में ताबड़तोड़ सभाएं कर भाजपा पर “बाहरी ताकतों” के जरिए बंगाल की राजनीति में दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं—जैसे महिला, किसान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों—को जनता के सामने प्रमुखता से रखा और “बंगाल की अस्मिता” का मुद्दा उठाया।
चुनाव एक नजर में
कुल सीटें: 294
पहला चरण: 152 सीटें
वोटिंग: 91–93% (रिकॉर्ड स्तर)
दूसरा चरण: 142 सीटें
मुख्य मुकाबला: भाजपा बनाम तृणमूल कांग्रेस
अन्य खिलाड़ी: कांग्रेस-वाम गठबंधन
पहले चरण के बंपर मतदान पर दोनों दल के अपने दावे
पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। भाजपा इसे “परिवर्तन की लहर” और सत्ता विरोधी रुझान का संकेत बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे अपनी नीतियों और योजनाओं पर जनता की मुहर के रूप में पेश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत आमतौर पर सत्ता के खिलाफ रुझान का संकेत देता है, लेकिन बंगाल जैसे राज्यों में यह समीकरण हमेशा सीधा नहीं होता। यहां स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की पकड़ और संगठनात्मक ताकत भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
दूसरा चरण: क्यों है ‘गेम चेंजर’
दूसरे चरण में जिन 142 सीटों पर मतदान होना है, उनमें शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र बड़ी संख्या में शामिल हैं। इन इलाकों में मतदान का पैटर्न अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों से अलग होता है और यहां मध्यम वर्ग, युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
विश्लेषकों के अनुसार यही कारण है कि दूसरा चरण पूरे चुनाव का “गेम चेंजर” साबित हो सकता है और अंतिम परिणाम की दिशा तय कर सकता है।
कुछ क्षेत्रों में त्रिकोणीय संघर्ष की संभावना
हालांकि मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस-वाम गठबंधन भी कई सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहा है। इससे वोटों का बिखराव होने की संभावना है, जो नतीजों को अप्रत्याशित बना सकता है।
सुरक्षा और चुनाव आयोग की तैयारी
दूसरे चरण के मतदान को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और संवेदनशील बूथों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
प्रचार के आखिरी दिन जिस तरह से सभी दलों के शीर्ष नेतृत्व ने आक्रामक रुख अपनाया, उससे साफ है कि पश्चिम बंगाल का यह चुनाव अब पूरी तरह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। पहले चरण की रिकॉर्ड वोटिंग ने जहां मुकाबले को रोमांचक बना दिया है, वहीं दूसरे चरण का मतदान यह तय करेगा कि राज्य की सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाएगी।
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